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पीएमसीएच की अव्यवस्था पर एमसीआई गंभीर

भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) ने पीएमसीएच को दुरुस्त करने के लिए राज्य सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम दिया है। इससे एमबीबीएस कोर्स के लिए नई सीटें बढ़नीं तो दूर पुरानी सीटों के आधार पर ही कॉलेज की मान्यता पर सवालिया निशान लग गया है। कमियों को दूर करने के लिए मात्र एक महीने का समय मिलने से सरकार हलकान है।ड्ढr एमसीआई की रिपोर्ट के मुताबिक पटना मेडिकल कॉलेज (पीएमसी) में 23 फीसदी शिक्षक कम हैं। शिक्षकों के 252 पद में से 56 खाली हैं।ड्ढr ड्ढr ड्ढr पीएमसीएच के अधीक्षक ओपी चौधरी को प्रशासनिक अनुभव नहीं है जो मानक के उलट है। अधीक्षक पद पर नियुक्ित के लिए प्रशासनिक कार्यो का दस साल का अनुभव होना चाहिए जबकि डा. चौधरी के पास मात्र पांच साल का प्रशासनिक अनुभव है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी अनुशंसा में एमसीआई ने मृदुल धर बनाम केन्द्र सरकार के एक केस का हवाला देते हुए कहा है कि पीएमसी की कमियों को देखते हुए सीटें बढ़ाने की राज्य सरकार की मांग को स्वीकृत नहीं किया जा सकता है। रिपोर्ट में एमसीआई ने कई मानकों की कमी का जिक्र करते हुए कहा गया है कि एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए पीएचसी में पीएसएम (एमडी) विभाग के शिक्षक ही नहीं है। लेक्चर रूम नहीं है। पीएमसीएच में ओपीडी और आईपीडी में मरीजों का रजिट्रशन काउन्टर पूर्णत: कम्प्यूटरीकृत नहीं है। 21 ओटी के 33 टेबुल मानकों के अनुरूप नहीं हैं। एनाटॉमी विभाग में भी कमियां हैं। लड़कों के हॉस्टल में फर्नीचर नहीं हैं। शिक्षकों में एक प्रोफेसर, 15 एसोसिएट प्रोफेसर एवं 40 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद खाली हैं। सबसे ज्यादा कमी स्त्री एवं प्रसूति विभाग एवं जेनरल मेडिसीन विभाग में है। दोनों ही विभागों में एक-एक एसोसिएट प्रोफेसर और 8-8 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद खाली हैं। टीबी, चेस्ट विभाग में तो प्रोफेसर का पद ही रिक्त है। शिशु विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के 5 और हड्डी रोग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के 3 व असिस्टेंट प्रोफेसर के दो पद खाली हैं।ं

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