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रैनबैक्सी-फाइजर के बीच जारी पेटेंट विवाद समाप्त

देश की सबसे बड़ी फार्मा कंपनी रैनबैक्सी ने अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर के साथ जारी पेटेंट विवाद को बुधवार को एक करार कर समाप्त कर दिया। इस करार के तहत रैनबैक्सी को कोलेस्ट्रोल कम करने की वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक बिकने वाली दवा एटोरवास्टाटिन (लिपिटर) के जेनरिक संस्करण को बेचने का अधिकार मिल गया है। रैनबैक्सी 30 नवंबर 2011 से इस दवा को बाजार में उतारेगी। वर्ष 2007 में पूरे विश्व में सबसे अधिक यह दवा बिकी थी और इसका कुल कारोबार 12.7 अरब डॉलर का हुआ था। रैनबैक्सी ने कहा कि 30 नवंबर 2011 से 180 दिनों के बाद वह अमेरिका में इस दवा को बेचना शुरू करेगी। रैनबैक्सी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक मालविदंर मोहन सिंह ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि रैनबैक्सी और फाइजर के बीच हुए इस विस्तृत समझौते से पेटेंट को लेकर जारी कई विवाद समाप्त हो गए हैं। सिंह ने कहा कि इस विवाद के समाप्त हो जाने से विश्व में सबसे अधिक बिकने वाली यह दवा अमेरिका को छोड़कर अन्य बाजार में उससे पहले की पेश कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे यह दवा मरीजों को समय पर उपलब्ध हो सकेगी। रैनबैक्सी के पास इस दवा को अलग-अलग समय पर विश्व के सात देशों कनाडा, बेल्जियम, नीरदलैंड, जर्मनी, स्वीडन, इटली और ऑस्ट्रेलिया में बेचने का लाइसेंस है। रैनबैक्सी और फाइजर ने इस दवा को लेकर मलेशिया, बुर्नेई, पेरू और वियतनाम में बेचने को लेकर जारी विवाद का समाधान भी कर लिया है। लेकिन पांच यूरोपीय देश फिनलैंड, स्पेन, पुर्तगाल, डेनमार्क और रोमानिया में जारी कानूनी लड़ाई दोनों कंपनियों के बीच जारी रहेगी। इसके साथ ही इन दोनों कंपनियों के बीच विश्व के कई अन्य देशों में चल रही कानूनी लड़ाई समाप्त हो जाएगी। रैनबैक्सी कई देशों में इस दवा के पेटेंट को लेकर वर्ष 2003 से कानूनी लड़ाई लड़ रही है। इस समझौते में दोनों कंपनियों ने अमेरिका में एक्यूप्रील और इक्वाडोर में वियाग्रा के पेटेंट को लेकर जारी कानूनी लड़ाई भी समाप्त हो गई है। फाइजर का अमेरिका में क्यूनाप्रिल हाइड्रोक्लोरिन और इक्वाडोर में सिल्डेनाफिल को लेकर रैनबैक्सी के साथ पेटेंट से संबंधित सभी कानूनी लड़ाई भी समाप्त हो गई है। जापानी फार्मा कंपनी डाईची ने हाल ही में रैनबैक्सी के 50.1 प्रतिशत शेयर खरीदने के लिए कंपनी के प्रवर्तक सिंह परिवार के सभी शेयर 4.6 अरब डॉलर में खरीदने का सौदा किया है। रैनबैक्सी विश्व में सवा सौ देशों में कारोबार करती है और 11 देशों में इसकी उत्पादन इकाइयां है।

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