अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नाम बड़े पर ..

एक अखबार में भगवान वेंकटेश्वर के लिए लघुनाम ‘वेंकि’ पढ़ा। दिल्ली की एक एलीट कॉलोनी में मध्यकाल की एक महान विभूति की स्मृति को समर्पित स्कूल का नाम भी उनके आद्यक्षरों पर है।ड्ढr जिंदगी के हर क्षेत्र में शार्टकट और संक्षिप्तता आ गई है। हर कोई कम स कम शब्दों में अधिक से अधिक बात कहना-सुनना चाहता है। हमारे नाम भी इससे अछूते नहीं बचे हैं। मुख-सुख के अलावा अंग्रेजीदा दिखन के फेर में बहुत छोट कर दिए हैं हमने अपने व दूसरों के नाम जो हमारे बुजुर्गों ने बड़े चाव के साथ और काफी मशविरे के बाद रखे थे। नाम के साथ एक पूरी पृष्ठभूमि रही है। परिवार में बच्चा बाद में पैदा होता था, उसका नाम रखन की कवायद पहले शुरू हो जाती थी। नामकरण के समय दर्जनों नामों पर चर्चा होती थी। कई नाम सुझाये व रद्द किये जाते थे। घंटों लग जाते थे एक नाम पर सहमति बनाने में। कई बार बीसियों नामों पर चर्चा होने पर भी किसी एक नाम पर आम राय नहीं बन पाती थी। बच्च के मां-बाप को कोई नाम पसंद आता था तो दादा-दादी या नाना-नानी उसे रद्द कर देते थे। अगर दादा-दादी या नाना-नानी किसी नाम पर सहमत होते थे तो वह मां-बाप को नहीं जंचता था।ड्ढr संक्षिप्तीकरण के इस फेर में व्यक्ित की नामगत पहचान लुप्त हो गई है। राजेन्द्र कुमार अब आर के, कामता प्रसाद के पी, आत्म प्रकाश ए पी, चंद्र प्रकाश सी पी, मंगल प्रसाद एम पी और उत्तम प्रसाद यू पी हो गए हैंै। अब महात्मा गांधी रोड सिकुड़ कर ‘एम जी रोड’, रामकृष्ण पुरम ‘आर के पुरम’, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ‘जे एन यू’, लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल ‘एल एन जे पी’ हो गए हैं। भागमभाग की जिंदगी में जहां बंदे को महान हस्तियों का पूरा नाम लेने तक की फुर्सत नहीं, उनके बारे में जानन की रुचि और उत्सुकता कहां और कितनी होगी?ड्ढr

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: नाम बड़े पर ..