DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जलमहल से बेदखल मछली रानी

बोचहां में तालाब और मन का सव्रेक्षण करने गई टीम को मछली की जगह फसलें एवं इमारतें मिल रही हैं। कई सरकारी तालाब स्थानीय दबंगों के कब्जे में है। इसका खुलासा सव्रेक्षक रणधीर कुमार एवं दिनेश कुमार ने जिला मत्स्य अधिकारी को दिये सव्रेक्षण रिपोर्ट में किया है। जिला मत्स्य पदाधिकारी राशिद फारूकी ने बताया कि रिपोर्ट को मत्स्य निदेशालय भेजा गया है। विभागीय निर्देश के अनुसार कारवाई होगी। रिकार्ड के अनुसार बोचहां प्रखंड में 106 सरकारी मन व पोखर हैं, परन्तु इनमें से अधिकांश विलुप्त हो चुके हैं। वहां मछली उत्पादन बढ़ाने की योजना के लिए तालाब और मन खोजे नहीं मिल रहे हैं।ड्ढr ड्ढr राज्य सरकार ने सरबदीपुर पंचायत स्थित गुढ़नी मन के विकास और सौन्दर्यीकरण के लिए 35 लाख रुपये की योजना को मंजूरी दी, परन्तु 15एकड़ में फैला यह मन लुप्तप्राय है। इसे पांच वर्ष पूर्व बोचहां के तत्कालीन सीओ, अंचल निरीक्षक एवं राजस्व कर्मचारियों ने आम लोगों को आवंटित कर दिया। रतनपुरा मन डबरा को 1में स्थानीय राजकुमार राय के नाम कर दिया गया जबकि विभाग अब भी उसे अपना मान रहा है। भुताने पंचायत में स्थित तीन पोखर विभाग के रिकार्ड में नहीं हैं, परन्तु सरकार के अभिलेखों में उसे स्पष्ट देखा जा सकता है। आदि गोपालपुर पंचायत के दो पोखर स्थानीय शिवशंकर के कब्जे में है। वहां खेती हो रही है। उनसर पंचायत में विभाग के 13 पोखर हैं जिनमें अधिकांश पर पक्का मकान बना लिया गया। पोखर संख्या पांच में मुखिया ने सरकारी पैसे से ईंट सोलिंग करवा दी। करणपुर गरहा, देवगण, हेमनपुर मन के 8 एकड़ के पोखर अवैध कब्जे में है। स्थानीय दबंग यहां मछली पालन करा रहे हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: जलमहल से बेदखल मछली रानी