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घरलू नौकर खतरे की घंटी!

दिल्ली के आरुषि मर्डर केस में घरलू नौकरों की कथित भूमिका, महानगर की शक्ल अख्तियार कर रहा पटना के लिए भी खतर की घंटी है! पटना के लोग नौकरों की पुलिस वेरिफिकेशन नहीं करा रहे हैं। यही स्थिति ड्राइवरों और किराएदारों को लेकर भी है। ‘निश्चिंतता की यह नींद’ कहीं ‘मौत की नींद’ में न बदल जाए! पटना पुलिस भी अब इसको लेकर आशंकित है। पटना के एसएसपी अमित कुमार स्वीकार करते हैं कि लोग नौकर तो रख रहे हैं लेकिन उनका पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराते।ड्ढr ड्ढr दूसरी ओर बिहार पुलिस यह मानती है कि दिल्ली और दूसर राज्यों से नौकरों और दूसर लोगों के वेरिफिकेशन के लिए वहां की पुलिस उनसे संपर्क करती है। पुलिस प्रवक्ता-सह-एडीजी (विधि-व्यवस्था) अनिल सिन्हा के अनुसार स्पेशल ब्रांच में इसके लिए एक अलग सेल है जिसके जरिए संबंधित जिलों से उन्हें वेरिफाई किया जाता है।ड्ढr नौकरों के मामलों में पटना के लोग बेहद लापरवाह हैं। यह आम शिकायतें रही है कि लोग अंडर एज (नाबालिग) नौकर रखते हैं। लिहाजा उनका पुलिस वेरिफिकेशन कराना उनके लिए ही कानून के फंदे में फंसने जैसा है। ऐसे लोग पुलिस के पास जाने से कतराते हैं। जिन लोगों ने घरों में बालिग और उम्रदराज नौकरों को रखा है वे भी अभी तक इससे बचते रहे हैं।ड्ढr ड्ढr पटना के एसएसपी के अनुसार नौकरों के वेरिफिकेशन के लिए लोग लोकल थानों में नहीं जा रहे हैं। ड्राइवरों को कार की चाबी थमाने के पहले भी पुलिस के जरिए उनका वेरिफिकेशन नहीं कराया जा रहा। ड्राइवरों के बैकग्राउंड की जानकारी पुलिस को नहीं होती। महानगर की शक्ल ले रहे पटना में किराएदारों की तादाद भी बढ़ रही है। पर, किराएदार कौन है? इसकी पड़ताल के लिए मकान मालिक पुलिस से संपर्क नहीं करते। बिना नक्शा के अवैध निर्माण कर खड़ी हो रही इमारतों को पुलिस इसका एक बड़ा कारण मानती है।

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