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जर्जर पीपल पेड़ के नीचे लगती है क्लास

हम कंप्यूटर क्रांति के दौर में है, बातें ग्लोबल रस की हो रही है। लेकिन आज भी झारखंड शिक्षा के मामले में काफी पीछे है। राजधानी रांची में प्राइमरी स्कूल हेसल को देखकर चिराग तले अंधेरा वाली कहावत याद आती है। यहां न भवन है, न बेंच डेस्क। जाड़ा, गर्मी हो या बारिश हर मौसम में पीपल के पेड़ के नीचे ही क्लास लगती है।ड्ढr यहां 10बच्चे पढ़ते हैं। लोग इस ललक में बच्चों को पढ़ने भेजते हैं, कि कम से कम दोपहर का भोजन तो मिल जायेगा। बुधवार को साढ़े नौ बजे जब संवाददाता पहुंचा तो झमाझम बारिश में भी क्लास चल रही थी। शिक्षिका सनोका कुमारी छाता लगाये पढ़ा रही थीं। सामने दो छाते में नौ छात्र क से कमल और ख से खरगोश पढ़ रहे थे। पीपल का पेड़ भी जर्जर है। कभी भी दुर्घटना हो सकती है।ड्ढr पिछले साल शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने स्कूल में तिरपाल लगाने का निर्देश दिया था। मंत्री के निर्देश की मात्र खानापूर्ति ही हुई। अधिकारी चार बल्ली के सहार तिरपाल लगा चलते बने। अब तिरपाल भी फट गया है। मिड डे मील बगल के घर में बनता है। लोगों का कहना है कि ज्यादा बारिश होने पर छुट्टी कर दी जाती है। शिक्षिका को स्कूल अवधि तक पेड़ के नीचे बैठे रहना मजबूरी है। राजधानी में ऐसे 11 स्कूल है, जहां भवन नहीं हैं। कोई किराये के मकान में तो कही गोदाम में पढ़ाई होती है।

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