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राजरंग

गुरुकुल के कुलगुरु के क्या कहने..ड्ढr गुरुकुल के कुलगुरु के क्या कहने। इनकी हर अदा निराली है। इतिहास हो या भूगोल, साइकोलॉजी हो या केमेस्ट्री सबको फिािक्स के साथ जोड़ देते हैं। जोड़े भी क्यों नहीं! फिािक्स से ही सुचालक और कुचालक का पता चलता है। लेकिन कुलगुरु सुचालक और कुचालक की पहचान ठीक से नहीं कर पाते। इस कारण मुसीबत में भी पड़ जाते हैं। शिष्यों के विरोध का उन पर कोई असर नहीं पड़ता । लेकिन अपने सहयोगियों का विरोध नहीं झेल पाते। हमेशा जी सर.. जी सर करने वाले सहयोगी ही उनके विरोध में उतर आते हैं। जो दो-तीन महीने तक हल्ला बोल के बाद ही शांत होते है। इसके पीछे सिर्फ एक ही कारण है फिािक्स। हर चीज पर फिािक्स का जोर थोड़े ही चलता है। कुलगुरु कभी-कभी अनजाने में गलती कर बैठते हैं। नियमों में परिवर्तन करने में वे माहिर हैं। गोपनीय तरीके से काम करने कर पर भी उनकी गोपनीयता भंग हो जाती है। कारण भी है उनके सुचालक ही कुचालक बन जाते हैं। लेकिन फिािक्स का एक कमाल और भी है, जहां कुलगुरु हर किसी को पछाड़ देते हैं। सेमिनार या गोष्ठी में जब किसी विषय को फिािक्स के साथ जोड़कर बोलने लगते हैं तो अच्छे-अच्छों की छुट्टी हो जाती है। इतिहास और भूगोल वाले पीछे छूट जाते हैं।

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