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समय पूर्व बारिश से कपास उत्पादक चिंतित

समय से पहले हुई मानसूनी बारिश धान की खेती के लिए कुदरत का तोहफा है। अच्छी बारिश की वजह से धान-कृषकों की सिंचाई में आने वाली लागत को बचाया जा सकेगा लेकिन दूसरी तरफ कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए यह बारिश डर की सौगात भी लाई है। दरअसल कपास की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े (मीयली बग) की वृद्धि के लिए लिए गर्म और नम मौसम अनुकूल साबित होता है। मौसम का यही रुख कपास-कृषकों को परशान किए हुए है। देश के दो प्रमुख कपास उत्पादक राज्य पंजाब और महाराष्ट्र में तो किसानों को चेतावनी भी जारी की जा चुकी है कि इस साल कपास की फसल को कीड़ा लग सकता है। महाराष्ट्र पर पिछले वर्ष की अपेक्षा इसका अधिक असर हो सकता है। बीते साल राज्य के सात कपास उत्पादक जिलों में से सिर्फ तीन ही में फसल को नुकसान हुआ था। लुधियाना में पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) के डायरक्टर ऑफ एक्सटेंशन एन. एस. मल्ही का कहना है कि मानसून-पूर्व की बारिश ने मौसम को मीयली बग की वृद्धि के लिए अनुकूल बना दिया है। पंजाब और दूसर राज्यों में फसल की बुआई के एक महीने बाद कपास के कीड़े को खेतों के पास घास-फूस के ढेर पर देखा गया था। मल्ही ने चेतावनी देते हुए बताया कि एक बार अगर यह बीमारी कपास के पौधों पर फैल गई तो इसे नियंत्रित करना काफी मुश्किल होगा। पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी ने किसानों के लिए चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि मीयली बग अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है और एसे कुछ जिलों में नहर व पानी के स्त्रोतों के पास देखा गया है।ड्ढr पंजाब के भटिंडा, फिरोपुर और मुक्तसर को खतर के सबसे निकट घोषित किया गया है। हरियाणा का सिरसा जिला भी कीड़े से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकने वाले क्षेत्रों में शामिल है।

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