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गंगा की खातिरदो बिचाली परियोचानाएँ रोकीं

उत्तराखण्ड सरकार ने 480 मेगावाट की पाला-मनेरी और 380 मेगावाट की भैरोंघाटी पनबिाली परियोनाओं को स्थगित कर दिया है। दरअसल इन परियोनाओं का पर्यावरणविद विरोध कर रहे थे। राय सरकार के इस फैसले से केन्द्र सरकार पर भी एनटीपीसी की लोहारनागपाला परियोना को स्थगित करने का दबाव बढ़ गया है। उधर, इन परियोनाओं का विरोध कर रहे पर्यावरणविद प्रो.ोी.डी. अग्रवाल ने कहा है कि राय सरकार के इस फैसले के लिए वह मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परियोना को बंद करना उनकी माँग नहीं है। वह चाहते हैं गंगा का प्रवाह न रोकाोाए। यह फैसला होने तक वह अनशनोारी रखेंगे।ड्ढr परियोनाओं काोोरदार विरोध होता देख देहरादून से दिल्ली तक बुधवार रात भर क्राइसिस मैनेामेंट की फाइल पर चर्चा होती रही। गंगा का प्रवाह बनाए रखने की माँग कर रहे पर्यावरणविदों के कड़े रुख को देखते हुए मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूड़ी ने सुबह कैबिनेट की बैठक बुलाई और इसमें दोनों परियोनाओं को स्थगित करने का फैसला लिया गया। कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने दोपहर को एनटीपीसी के कार्यकारी निदेशक प्रो. के.के. शर्मा से भी बातचीत की। इससे पहले सोमवार को राय सरकार ने इस शर्त पर दोनों परियोनाओं को स्थगित करने की बात की थी कि बिाली की क्षतिपूर्ति केन्द्र सरकार कर। मुख्यमंत्री ने इस मसले पर केन्द्र से बातचीत के संकेत भी दिए थे।ड्ढr उधर, राय सरकार के फैसले के बाद भी अपने रुख पर अड़े प्रो. अग्रवाल ने उत्तरकाशी में अपना अनशनोारी रखा। उन्होंने कहा कि उनकी माँग अभी पूरी नहीं हुई है। उधर, प्रो. अग्रवाल के समर्थन में चित्रकूट से नानाोी देशमुख के संदेश के साथ पहुँचे डॉ. भरत पाठक अनशन स्थल पर बैठे। वरिष्ठ भाापा नेता डॉ. मोहन सिंह रावत गाँववासी ने भी प्रो. अग्रवाल को समर्थन देते हुए कहा किोरूरत पड़ी तो वह भी आंदोलन में कूदेंगे। प्रो. अग्रवाल ने कहा कि वह चाहते हैं कि गंगा अविरल बहती रहे। इसके लिए ठोस नीति न होने से वह चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों परियोनाएँ स्थगित करने कीोानकारी उन्हें न मिली है और न माँग पूरी हुई है।हिन्दुस्तान ब्यूरो देहरादून उत्तराखण्ड सरकार ने 480 मेगावाट की पाला-मनेरी और 380 मेगावाट की भैरोंघाटी पनबिाली परियोनाओं को स्थगित कर दिया है। दरअसल इन परियोनाओं का पर्यावरणविद विरोध कर रहे थे। राय सरकार के इस फैसले से केन्द्र सरकार पर भी एनटीपीसी की लोहारनागपाला परियोना को स्थगित करने का दबाव बढ़ गया है। उधर, इन परियोनाओं का विरोध कर रहे पर्यावरणविद प्रो.ोी.डी. अग्रवाल ने कहा है कि राय सरकार के इस फैसले के लिए वह मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परियोना को बंद करना उनकी माँग नहीं है। वह चाहते हैं गंगा का प्रवाह न रोकाोाए। यह फैसला होने तक वह अनशनोारी रखेंगे।ड्ढr परियोनाओं काोोरदार विरोध होता देख देहरादून से दिल्ली तक बुधवार रात भर क्राइसिस मैनेामेंट की फाइल पर चर्चा होती रही। गंगा का प्रवाह बनाए रखने की माँग कर रहे पर्यावरणविदों के कड़े रुख को देखते हुए मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूड़ी ने सुबह कैबिनेट की बैठक बुलाई और इसमें दोनों परियोनाओं को स्थगित करने का फैसला लिया गया। कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने दोपहर को एनटीपीसी के कार्यकारी निदेशक प्रो. के.के. शर्मा से भी बातचीत की। इससे पहले सोमवार को राय सरकार ने इस शर्त पर दोनों परियोनाओं को स्थगित करने की बात की थी कि बिाली की क्षतिपूर्ति केन्द्र सरकार कर। मुख्यमंत्री ने इस मसले पर केन्द्र से बातचीत के संकेत भी दिए थे।ड्ढr उधर, राय सरकार के फैसले के बाद भी अपने रुख पर अड़े प्रो. अग्रवाल ने उत्तरकाशी में अपना अनशनोारी रखा। उन्होंने कहा कि उनकी माँग अभी पूरी नहीं हुई है। उधर, प्रो. अग्रवाल के समर्थन में चित्रकूट से नानाोी देशमुख के संदेश के साथ पहुँचे डॉ. भरत पाठक अनशन स्थल पर बैठे। वरिष्ठ भाापा नेता डॉ. मोहन सिंह रावत गाँववासी ने भी प्रो. अग्रवाल को समर्थन देते हुए कहा किोरूरत पड़ी तो वह भी आंदोलन में कूदेंगे। प्रो. अग्रवाल ने कहा कि वह चाहते हैं कि गंगा अविरल बहती रहे। इसके लिए ठोस नीति न होने से वह चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों परियोनाएँ स्थगित करने कीोानकारी उन्हें न मिली है और न माँग पूरी हुई है।

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