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दो टूक

झारखंड में बदहाल नरगा को इंगित करता ललित मेहता हत्याकांड की जांच अब राज्य की सीआइडी नहीं, केंद्रीय एजेंसी सीबीआइ करगी। इस फैसले से सीएम मधु कोड़ा ने साफ कर दिया कि वह भी इस मामले की परत-दर-परत सच्चाई टटोलना चाहते हैं। स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी राहत मिली होगी। शायद अब न्याय मिले! लेकिन, एसे फैसले पुलिस और सीआइडी की छवि को चुनौती हैं। करोड़ों खर्चे वाले ये महकमे क्या महा सफेद हाथी बने रहेंगे? इनकी क्षमता, दक्षता और नीयत फिर सवालों में है। यह सवाल सरकारी खजाने की बर्बादी भर का नहीं, उस भरोसे का भी है जो प्रदेश के बाकी आमलोगों की नियति है। अच्छा होता, एक और पहल होती, इन सुरक्षा जांच एजेंसियों पर भरोसा लौटाने की।

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