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‘करार पर आगे बढ़ना सरकार के लिए आत्मघाती’

भारत अमेरिका परमाणु करार के सवाल पर कांग्रेस नीति संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से तनातनी के बीच वाम दलों ने संप्रग के घटकों को भरोसे में लेने का सिलसिला जारी रखा और इस अभियान की कमान स्वयं माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने संभाली। करात ने सुबह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता एवं कृषि मंत्री शरद पवार के निवास जाकर इस अभियान की शुरुआत की। जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अनजान इसी क्रम में लोकसभा में समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव मिले। समझा जाता है कि माकपा महासचिव पवार को भारत केन्द्रित परमाणु सुरक्षा उपायों पर अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सहमति के मसौदे पर गतिरोध के बीच वाम दलों के रुख से अवगत कराया और कहा कि अमेरिकी हाइड कानून तथा 123 समझौते के कई प्रावधानों पर संदेह एवं आपत्तियों के रहते सरकार की आेर से एकतरफा पहल की स्थिति में वही राजनीतिक संकट के लिए जिम्मेदार होगी। उन्होंने बाद में केरल भवन में एक संगोष्ठी को संबोधित करने के उपरांत संवाददाताआें से बातचीत में भी करार पर अमल की दिशा में किसी भी एकतरफा पहल के खिलाफ वाम दलों का सख्त रुख दोहराया, यद्यपि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को संप्रग सरकार के केवल एक मुद्दे पर आधारित सरकार नहीं होने के उनके ही वक्तव्य की याद दिलाते हुए आशा जताई कि सरकार पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा करेगी। पवार से सुबह के नाश्ते पर श्री करात की मुलाकात के बाद सूत्रों ने यूनीवार्ता से कहा कि वामपंथी पार्टियां नहीं चाहती कि उन्हें कोई ऐसा कदम उठाना पडे जिससे मनमोहन सरकार अस्थिर हो और देश को समय से पहले आम चुनावों का सामना करना पडे। लिहाजा वे चाहते हैं कि श्री पवार उभरते राजनीतिक संकट के समाधान के लिए हस्तक्षेप करें। केरल भवन में शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछडे वगर्ो के लिए आरक्षण के मुद्दे पर संगोष्ठी के उपरांत संवाददाताआें से बातचीत में करात ने संप्रग सरकार को राष्ट्रीय साझा न्यूनतम कार्यक्रम के अधूरे कार्य पूरे करने की सलाह भी दी। बाद में माकपा मुख्यालय एवं गोपालन भवन में राजधानी में मौजूद वाम नेताआें की भी एक बैठक हुई और बैठक के बाद भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने संवाददाताआें से साफ कहा कि परमाणु करार पर अमल की दिशा में आगे एक भी कदम सरकार के लिए आत्मघाती होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में वामपंथी पार्टियां संप्रग सरकार को अपने समर्थन पर पुनर्विचार करने को मजबूर हो जाएंगी। संप्रग एवं वाम दोनों पक्षों की आेर से तेज राजनीतिक सक्रियता के बीच राजा ने राष्ट्रीय जनता दल नेता एवं रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव से और भाकपा के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अनजान ने सपा नेता रामगोपाल यादव से मुलकात कर उन्हें वाम दलों के अपने रूख पर कायम रहने की जानकारी दी तथा संभावित राजनीतिक संकट को टालने के लिए हस्तक्षेप करने की अपील भी की। सूत्रों ने बताया कि बातचीत में श्री यादव ने साफ किया कि अमरीकी हाइड कानून तथा 123 समझौते पर उठे संदेहों सवालों एवं आपत्तियों के शमन का सरकार ने उपक्रम नहीं किया है और जब तक इनके समाधान के लिए नए तथ्य नहीं रख जाते तब तक परमाणु करार के खिलाफ अपने विरोध पर सपा कायम है। सपा नेता एवं सांसद शाहिद सिद्दीकी ने भी कल यही मत जाहिर किया था। वाम आपत्तियों एवं विरोधों को नजरअंदाज कर प्रारुप परमाणु सुरक्षा उपाय अंतिम अनुमोदन हेतु आई ए ई ए के बोर्ड आफ गवर्नर में ले जाने की सरकार की मंशा के संकेतों के बाद संप्रग की मुखिया कांग्रेस तथा वाम दलों दोनों ही पक्षों की आेर से सत्तारुढ गठबंधन के अधिक से अधिक घटकों एवं समर्थकों को साथ लेने की मुहिम में वाम दलों की कमान कल माकपा नेता सीताराम येचुरी ने संभाली थी। वह कल रेल मंत्री एवं राजद नेता लालू प्रसाद यादव, राकांपा महासचिव देवीप्रसाद त्रिपाठी से और अंत में विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी से भी मिले थे। संप्रग के घटक द्रविड मुनेत्र कषगम के नेता एवं भूतल परिवहन मंत्री टीआर बालू इसी क्रम में परसों करात से बातचीत कर चुके हैं।

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  • Web Title: एटमी करार पर आगे बढ़ना आत्मघाती : वाम