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चिविवि के खुले वार्ड में गर्भ से निकालना पड़ा मृत शिशु

इस घटना को बताने में लापरवाही, दर्द और शर्म ौसे शब्द छोटे पड़ सकते हैं। चिकित्सा विश्वविद्यालय के मेडिसिन विभाग में एक गर्भवती महिला तीन घण्टे तक गर्भ से बाहर निकल आए मृत शिशु को निकालने के लिए चिल्लाती रही। मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों ने महिला रोग विशेषज्ञ को बुलाने के लिए क्वीन मेरी में संदेश दिया। लेकिन विशेषज्ञ को आने में छह घण्टे लग गए। इस बीच मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों ने खुद गर्भ से बाहर आ गए मृत शिशु को किसी प्रकार से बाहर निकाला। यह पूरा काम वार्ड में ही दूसर मरीाों के सामने हुआ। प्रशासन ने घटना को गंभीर मानते हुए आपात बैठक बुलाई लेकिन दोषी डॉक्टरों को माफीनामा लेकर छोड़ दिया गया।ड्ढr मेडिसिन विभाग के इमरोंसी वार्ड में पीलिया होने के कारण भर्ती कराई गई इंद्रावती के साढ़े पाँच माह का गर्भ था। बुधवार की रात पौने नौ बो इंद्रावती को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। महिला रोग विशेषज्ञ को बुलाने के लिए मेडिसिन विभाग ने क्वीन मेरी में आपात संदेश ोा लेकिन 10 बो तक महिला रोग विशेषज्ञ नहीं आईं। इस बीच महिला का मृत शिशु गर्भ से बाहर निकल आया। रात 12 बो तक तीन संदेश महिला रोग विभाग ोो गए फिर भीोवाब नहीं मिला। इसके बाद मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों ने खुद ही मृत शिशु को नर्सो की मदद से गर्भ से बाहर निकाला। इस बीच महिला के लगातार रक्तस्राव होता रहा। वार्ड में माबूरी में दूसर गंभीर मरीाों के सामने ही यह सब हुआ। रात में तीन बो यानी घण्टे बाद क्वीन मेरी से एकोूनियर डॉक्टर गांधी वार्ड पहुँची। गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने महिला रोग विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता दास व अन्य सभी डॉक्टरों को बुलाकर इस मामले पर गंभीर आपत्ति की। डॉ. टंडन का कहना है कि दोषी डॉक्टरों ने माफी माँगते हुए भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न होने की बात कही। इंद्रावती अभी भी 6 नम्बर गांधी वार्ड में भर्ती है। उसका उपचार करने वाले डॉ. अरविंद मिश्र का कहना है कि मरीा की हालत अब स्थिर है।ं

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