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कमजोर छात्रों के लिए आठवीं से ही कोचिंग

मैट्रिक परीक्षा का रिाल्ट बेहतर करने के लिए शिक्षा विभाग ने कई योजनाएं तैयार की है। इसी की अगली कड़ी है बच्चों के लिए स्पेशल कोचिंग क्लासेज और रिमेडियल क्लासेज की व्यवस्था करना।ड्ढr इसके तहत वर्ग आठ से ही छात्रों को मैट्रिक परीक्षा ध्यान में रखकर तैयारी करायी जायेगी। सभी स्कूल में कमजोर छात्रों के लिए विशेष कोचिंग क्लास चलेंगे। स्कूल से मैट्रिक परीक्षा में शामिल होनेवाले परीक्षार्थियों की जवाबदेही शिक्षकों को दी गयी है। विशेष कक्षा में छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने की जिम्मेवारी संबंधित शिक्षकों की होगी।ड्ढr स्वतंत्र छात्रों को भी मैट्रिक रिमेडियल क्लास से जोड़ने का फरमान दिया गया है, ताकि हर हाल में मैट्रिक परीक्षा परिणाम को और बेहतर किया जा सके। डीइओ अशोक शर्मा के अनुसार प्राथमिक कक्षाओं में छात्रों को फेल नहीं करने का प्रावधान है।ड्ढr इस कारण प्राथमिक स्तर से वर्ग आठ में पहुंचे छात्रों का मूल्यांकन कर उसे उस योग्य बनाने के लिए यह व्यवस्था की गयी है। साथ ही विगत वर्ष की तरह इस बार भी जिलास्तर पर रिमेडियल कक्षाएं चलायी जायेंगी। इसमें छात्र की उलझन को विशेषज्ञ सुलझायेंगे। रिमेडियल क्लास से विद्यार्थियों को काफी फायदा मिलने की उम्मीद सरकार को है।

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