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महाभारत काल से जुड़ा है हिंडन का रिश्ता

गाजियाबाद। मुख्य संवाददाता। सात जनपदों के बीच से गुजरने वाली हरनंदी नदी का रिश्ता महाभारत काल से है। नदी किनारे रहने वाले ग्रामीण बरसों से यह बताते हैं। अब आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम को सुठारी में ऐतिहासिक चहि्न् मिले हैं। यह पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण साइट है। एएसआई की एक टीम आगरा में रिपोर्ट जमा करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे खुदाई का फैसला लिया जाएगा।

वेद व्यास की महाभारत में लिखा है कि हिंडन किनारे पांडवों को जलाने के लिए लाक्षागृह बनाया गया था। हिंडन के आस-पास पुरानी सभ्यताओं के चहि्न् मिलते हैं। सुठारी गांव में पेंटिड ग्रेवियार के टुकड़े मिले थे। इसकी सूचना जिला प्रशासन और एएसआई को दी गई। मंगलवार को एएसआई का एक सदस्य सुठारी पहुंचा। एएसआई आगरा से आए डॉ. केबी सिंह ने बताया कि इस साइट पर पेंटिड ग्रेवियार मिले हैं। यह महाभारत काल से जुड़े हुए हैं। यह समय तीन हजार से 35 सौ वर्ष पुराना हो सक ता है।

डॉ. केबी सिंह ने बताया कि उन्होंने गांव के दोनों टीलों का निरीक्षण किया है। अब वह अपनी रिपोर्ट आगरा में दाखिल करेंगे। इसके बाद एएसआई आगे फैसला लेगा। इस साइट पर काम कर रहे इतहिासकार डॉ. केके शर्मा ने बताया कि पुरातात्विक दृष्टि से यह महत्वपूर्ण साइट है। एक टीले से महाभारतकालीन चित्रित दूषर मृदभांड मिले हैं। दूसरे टीले से हड़प्पा काल के अवशेष मिले हैं। यह टीला मंदिर के पास है। डॉ. शर्मा यूजीसी के एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।

यह प्रोजेक्ट आर्कियोलाजिकल इनवेस्टिगेशन ऑफ यमुना हिंडन दोआब है। उन्होंने बताया कि दोनों नदियों के बीच में पुरानी सभ्यता के चहि्न् मिलते हैं। अगर कडिम्यों को जोड़ा जाए तो हम पुराने इतिहास के नजदीक पहुंच सकते हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि हिंडन नदी घाटी सभ्यता अपने समय पूरी विस्तृत रही होगी। इसे संजोने की जरूरत है।

जलबिरादरी के विक्रांत शर्मा और योगेश यादव ने बताया कि इस महत्वपूर्ण साइट पर खनन रोकने के लिए कुछ फ्लैक्स तैयार किए गए हैं। बुधवार को साइट पर यह फ्लैक्स लगाए जाएंगे।

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