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इस सच से कैसे मुंह फेरेंगे श्रीनिवासन

एन श्रीनिवासन वोट के गणित के दम पर अब भी बीसीसीआई अध्यक्ष की अपनी कुर्सी बचा सकते हैं। आईसीसी में भारत के दबदबे के चलते हाल ही में उन्हें मिली चेयरमैन की कुर्सी पर भी फिलहाल कोई खतरा नहीं है। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी यह है कि एन श्रीनिवासन का झूठ सामने आ गया है। स्पॉट फिक्सिंग मामले के सामने आने के बाद श्रीनिवासन ने कहा था कि उनके दामाद गुरुनाथ मयप्पन सिर्फ एक क्रिकेट-प्रेमी हैं और उनका चेन्नई सुपर किंग्स टीम से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन स्पॉट फिक्सिंग मामले की जांच के लिए बनाई गई कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि मयप्पन किसी भी सूरत में सिर्फ क्रिकेट -प्रेमी नहीं थे, बल्कि चेन्नई की टीम में उनका रोल काफी अहम था।

वह टीम की बैठकों का हिस्सा होते थे। वह खिलाड़ियों की नीलामी में हिस्सा लेते थे। इस जांच रिपोर्ट के आने के बाद बोर्ड अध्यक्ष श्रीनिवासन ने फिलहाल यह कहकर काम चला लिया है कि वह रिपोर्ट को पढ़ने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देंगे। श्रीनिवासन फिलहाल इस बात का जवाब देने से बच रहे हैं कि उन्होंने स्पॉट फिक्सिंग की शुरुआती जांच के दौरान मयप्पन को सिर्फ क्रिकेट-प्रेमी क्यों बताया था। गंभीर बात यह भी है कि जस्टिस मुद्गल ने अपनी रिपोर्ट में एन श्रीनिवासन को लेकर ‘कॉनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ की बात कही है, क्योंकि श्रीनिवासन बोर्ड के अध्यक्ष ही नहीं हैं, आईपीएल की टीम चेन्नई सुपर किंग्स का मालिकाना हक भी उनकी कंपनी के पास है। भारतीय टीम के कप्तान धौनी चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान होने के साथ श्रीनिवासन की कंपनी में एक बड़े पद पर कार्यरत भी हैं।

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि श्रीकांत चेन्नई की टीम के ब्रांड एंबेसडर होने के साथ टीम इंडिया के मुख्य चयनकर्ता थे। यानी श्रीनिवासन ने भारतीय क्रिकेट को चेन्नई में समेटकर रख दिया है। वैसे, जस्टिस मुद्गल की जांच से पहले बीसीसीआई ने अपनी एक जांच समिति बनाई थी, जिसकी रिपोर्ट में हर किसी को क्लीन-चिट दे दी गई थी। इसी रिपोर्ट के खिलाफ पीआईएल दायर की गई थी, जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने जांच रिपोर्ट को खारिज किया। बीसीसीआई के लिए फिलहाल राहत की बात इतनी है कि सुप्रीम कोर्ट ने 12 फरवरी को होने वाली आईपीएल में खिलाड़ियों की नीलामी पर रोक नहीं लगाई है।

नीलामी के बाद आईपीएल गवर्निग कौंसिल की बैठक होनी है, जिसमें बोर्ड का अगला कदम तय होगा। लेकिन इन सभी बातों के बीच एन श्रीनिवासन के सामने इस बात की चुनौती बनी रहेगी कि वह खुद को इस पूरी कलंक-कथा से कैसे बाहर रखते हैं। स्पॉट फिक्सिंग का आरोप एक ऐसे अधिकारी के दामाद पर लगा है, जो सिर्फ बीसीसीआई का अध्यक्ष नहीं है, बल्कि वह दुनिया भर में क्रिकेट का संचालन करने वाली सबसे बड़ी संस्था आईसीसी का भी अध्यक्ष है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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