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..तो सपा बचाएगी सरकार

वामपंथी पार्टियों द्वारा एटमी डील पर आगे बढ़ते ही राष्ट्रपति को समर्थन वापसी का पत्र सौंपने की पक्की संभावनाओं के बाद कांग्रेस के रणनीतिकारों ने लोकसभा में सरकार बचाने का हिसाब-किताब तैयार कर लिया है। ऐसे में समाजवादी पार्टी के 3सांसद सरकार को बचा सकते हैं। संप्रग सरकार को वाम दलों को छोड़कर 237 लोकसभा सदस्यों का समर्थन हासिल है। वाम दल के पास 5सांसद हैं। इनके अलावा बसपा के 17 सांसद, टीआरएस के तीन और छह निर्दलीय भी हैं, जो न तो सरकार के साथ खड़े हैं और न ही विपक्ष के साथ। कांग्रेस से नजदीकियाँ बढ़ने के संकेत दे चुकी सपा ने अब तक एटमी डील के संबंध में अपना पक्ष साफ नहीं किया है। सपा महासचिव शाहिद सिद्दिकी का कहना था, ‘हमारी पार्टी न तो अमेरिका के खिलाफ है और न ही एटमी डील के। लेकिन हाईड कानून को लेकर हमार मन में कई आशंकाए हैं।’ सिद्दिकी ने इस अखबार से बातचीत में कहा कि अगर सरकार हाईड एक्ट व डील के पक्ष में कुछ नए तथ्य या प्रस्ताव लेकर आती है तो उन पर हम पुनर्विचार को तैयार हैं। सपा के समर्थन के बाद अगर वामदल एटमी डील पर वोटिंग से बाहर रहते हैं तो भी सरकार बच सकती है। शुक्रवार को माकपा महासचिव प्रकाश करात का मुलायम सिंह व सपा के दूसर वरिष्ठ नेता प्रो. राम गोपाल यादव से फोन संपर्क बना रहा। उधर, भाकपा महासचिव ए.बी. बर्धन ने कहा कि हमें समर्थन वापस लेने को बाध्य किया गया तो इसके लिए सरकार ही खुद जिम्मेदार होगी। उधर, भाजपा ने चुटकी ली है कि वाममोर्चा ने संप्रग सरकार का स्वाद चखा है इसलिए वह सरकार से समर्थन वापस लेने का साहस नही जुटा पाएगी।

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