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मुंह में नोट खोंसने का खेल

क्रिकेट नोट, नेताओं, उद्योगपतियों, सुंदरियों, बैट और बॉल (क्रम महत्व के अनुसार) का खेल है। ऐसे कई आईपीएल मैच हिट रहे हैं, जिनमें विराट कोहली तो खराब खेले, पर डांसरों ने डांस झक्कास किया। खिलाड़ी न्यूजीलैंड में या कहीं भी खराब खेलें, फिक्र नहीं। अब उम्मीदों की छोटी-मोटी किरणें नहीं, बल्कि फुल स्विस बैंक बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया उर्फ बीसीसीआई में देखा जा सकता है। श्रीनिवासन के नेतृत्व ने बीसीसीआई ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) में ऐसा खेल कर दिया है कि इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत की मनमर्जी जमकर चलेगी। पुरानी बारात के सीन याद आ गए, बहुत-अमीर और छिछोरे बाराती मुंह में नोट खोंसकर नाच किया करते थे (कई जगह तो अब भी करते हैं), नृत्यांगनाओं को उनके करीब आकर उनके मुंह से नोट निकालकर अपने कब्जे में लेने होते थे। पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश कुनमुना रहे हैं, पर बेटे नोट कहां हैं तुम्हारे पास? एक पाकिस्तानी क्रिकेटर ने कहा कि दुनिया की कुल क्रिकेट कमाई का 80 प्रतिशत भारत से आता है। मुंह में नोट खोंसकर तो डांस बीसीसीआई वाले  ही कर-करवा सकते हैं।

भारत के गली-मुहल्ले छाप क्रिकेट की परंपराओं को अब इंटरनेशनल क्रिकेट में लाने की जरूरत है। मुहल्ला क्रिकेट की परंपरा है कि जिसका बैट, पैड, बॉल और विकेट होता है, उसे एक बार आउट होने पर भी आउट नहीं माना जाता, दो बार आउट होने पर ही उसे आउट दिया जाता है। अब प्रतिद्वंद्वी टीम का भुगतान, बैट, पैड, बॉल, विकेट, सब बीसीसीआई ही देगी, पर विराट कोहली को पांच बार आउट होने पर ही आउट माना जाए और ईशांत शर्मा एक छोर पर विकेट ले, तो दोनों छोरों के बल्लेबाजों को आउट करार दिया जाए। रैना के पांच कैच छोड़े जाएं और उनके चौके को छक्का माना जाए। विराट कोहली को दस मौकों का प्रावधान हो। अगर वह अपने शैंपू बेचने वाले मॉडलिंग कांट्रेक्ट का हस्तांतरण उस बॉलर को कर दे, जिसने उन्हें आउट किया था। संभावनाएं अपार हैं, अगर मुंह में खोंसने के लिए बहुत-से नोट हों।

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