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मोदी को घर में लगाना होगा जोर

मोदी को घर में लगाना होगा जोर

गुजरात के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी अपने ही राज्य में ‘मोदी राज में सिर्फ मोदी’ के लिए खासी मेहनत करनी पड़ेगी। हालांकि गुजरात में 1998 से लगातार केसरिया राज है लेकिन 2014 में राहें इतनी आसान नहीं होंगी। पिछले दो बार के आम चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बहुत शानदार नहीं रहा है। इस बार बेहतर जीत के लिए मोदी को विशेष प्रयास करने पड़ेंगे। ये प्रयास मोदी अपनी पार्टी के लिए चलाए जा रहे अभियानों के दौरान ही कर सकते हैं।

भाजपा के प्रदेश महासचिव विजय रूपानी ने कहते हैं कि मोदी की लोकप्रियता ही अब पार्टी की उम्मीद है। इस बार हम गुजरात में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे और राज्य की सभी 26 सीटों से जीत दर्ज करेंगे। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुसार इस बार राज्य में भाजपा को 22 से 25 सीटें मिल सकती हैं।

नब्बे के दशक में भाजपा के पास राज्य की सभी 26 सीटें थीं लेकिन 2004 में हुए लोकभा चुनाव में पार्टी की सीटें 20 से घटकर 14 हो गईं। दिसंबर 2002 में हुए विधानसभा चुनावों में राज्य में भाजपा 182 सीटों में से 127 सीटों पर जीत दर्ज की थी। लोकसभा के 2009 के चुनाव में भी भाजपा का प्रदर्शन उम्मीद से कमतर रहा। तब प्रधानमंत्री के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी के राज्य से चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी 15 सीटों पर  ही जीत सकी।

भौगोलिक रूप से देखा जाए तो गुजरात चार क्षेत्रों में बंटा हुआ है- सौराष्ट्र, उत्तर, दक्षिण और मध्य गुजरात। सौराष्ट्र में 2009 में कांग्रेस ने चार और भाजपा ने 4 सीटें पर जीत दर्ज कराई थी। वहीं उत्तर गुजरात में 5 सीटें भाजपा और दो सीटें कांग्रेस के पाले में गईं। दक्षिण गुजरात में आदिवासी समाज के लिए आरक्षित दो सीटें कांग्रेस के पाले में गई और भाजपा ने तीन सीटें जीतीं। वहीं मध्य गुजरात में दोनों पार्टियों ने तीन-तीन सीटें जीतीं।

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