DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कांग्रेस ने आंध्रप्रदेश के छह सांसदों को पार्टी से निकाला

कांग्रेस ने आंध्रप्रदेश के छह सांसदों को पार्टी से निकाला

आंध्र प्रदेश के विभाजन का विरोध कर रहे और इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने वाले सीमांध्र के छह लोकसभा सांसदों को मंगलवार को कांग्रेस ने निष्कासित कर दिया। आंध्र प्रदेश में इस मुद्दे पर विरोध का सामना कर रही कांग्रेस ने यह कदम उठाकर पृथक राज्य के गठन का विरोध करने वालों को कड़ा संदेश दिया है। हालांकि करीब एक दर्जन सांसद अभी भी इसी बात पर अड़े हैं कि संसद में तेलंगाना विधेयक आने पर वे इसके खिलाफ मत देंगे।

कांग्रेस के महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आंध्र प्रदेश के इन छह सांसदों के निष्कासन के अनुशासन समिति के फैसले को अपनी मंजूरी दे दी है। यह निष्कासन तत्काल प्रभावी हो गया। कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा जिन सांसदों को निष्कासित किया गया है उनके नाम हैं साबाम हरि, जी वी हर्ष कुमार, वी अरुण कुमार, एल राजगोपाल, आर संबाशिव राव और ए साईप्रताप।

इन सभी सांसदों ने टीडीपी जैसे कुछ अन्य दलों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर दस्तखत किए हैं और पार्टी तेलंगाना मुद्दे पर यह अप्रत्याशित कदम उठाकर एक कड़ा संदेश देना चाहती है। सीमांध्र के जिन बारह पार्टी सांसदों ने इस नोटिस पर दस्तखत नहीं किए हैं उनमें से एक अनंत वेंकटरामी रेड्डी ने कहा कि हम राज्य के विभाजन के इस विधेयक के पूरी तरह खिलाफ हैं और जब यह सदन में मतदान के लिए आएगा तब इसके विरोध में मत देंगे। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि विधेयक गिर जाए।

सदन में सीमांध्र क्षेत्र के कुल 25 सांसद हैं जिनमें से 18 कांग्रेस के, तीन वाईएसआर कांग्रेस के और चार टीडीपी के हैं। रेड्डी ने कहा हालांकि उनके साथ ही सीमांध्र के अन्य पार्टी सांसद भी इस विधेयक के खिलाफ हैं, लेकिन हम अपनी ही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव कैसे ला सकते हैं। फिर भी एक बात साफ है कि हम तेलंगाना विधेयक के पूरी तरह खिलाफ हैं।

सीमांध्र क्षेत्र के पार्टी सांसदों का यह रुख कांग्रेस के लिए चिंता का कारण बना हुआ है जो बार बार दोहरा रही है कि वह तेलंगाना राज्य के गठन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पार्टी सांसदों के निष्कासन की घटना के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने कहा कि कांग्रेस तेलंगाना राज्य के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हाल का यह कदम इसी दिशा में उठाया गया अगला कदम है।

पार्टी का यह कदम केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा आंध्र प्रदेश के विभाजन और पृथक तेलंगाना राज्य के निर्माण को मंजूरी दिए जाने के कुछ ही दिन बाद आया है। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राज्य विधानसभा द्वारा नामंजूर किए जाने के बावजूद गत शुक्रवार को इस विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी थी।

तेलंगाना राज्य के गठन के प्रस्ताव के अनुसार नए राज्य में दस जिले होंगे और राज्य के शेष तेरह जिले आंध्र प्रदेश में होंगे। राज्य के गठन से दस साल तक हैदराबाद दोनों राज्यों की राजधानी बना रहेगा और इस अवधि का दस वर्ष से ज्यादा विस्तार नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि सोमवार को राष्ट्रपति ने भी आंध्र प्रदेश के विभाजन को अपनी मंजूरी दे दी थी। सरकार की ओर से ऐसे संकेत मिले हैं कि वह अगले कुछ दिनों में संसद में इस विधेयक को पेश करेगी।

साबाम हरि और कुछ अन्य सदस्यों ने कुछ दिन पहले इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। हरि ने यह धमकी भी दी थी कि यदि राज्य का विभाजन किया गया तो वे आत्मदाह कर लेंगे। सांसदों को निष्कासित करने का फैसला कर कांग्रेस संभवत: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन किरण कुमार रेड्डी समेत पार्टी के उन अन्य सदस्यों को कड़ा संदेश देना चाहती है जो तेलंगाना के गठन का जोरदार विरोध कर रहे हैं, जबकि पार्टी ने इस बारे में अपना रवैया तय कर लिया है।

पार्टी और सरकार दोनों ही कई बार इस बात को दोहरा चुके हैं कि वे पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस बीच जैसी कि पहले आशा की जा रही थी, उसके विपरीत तेलंगाना विधेयक अब राज्यसभा की जगह पहले लोकसभा में पेश किया जाएगा क्योंकि राज्यसभा सचिवालय ने इस विधेयक को धन संबंधी विधेयक बताया है। इसके बाद सरकार ने इस संबंध में राष्ट्रपति से फिर से संपर्क किया है। सूत्रों ने बताया कि इस विधेयक को पहले राज्यसभा में पेश करने की सरकार की मंशा की संवैधानिकता पर सवाल उठाए गए थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कांग्रेस ने आंध्रप्रदेश के छह सांसदों को पार्टी से निकाला