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प्री बोर्ड के नतीजे भी हैं खास

प्री बोर्ड के नतीजे भी हैं खास

छात्रों की यह प्रवृत्ति होती है कि सफलता को वे पचा नहीं पाते तथा असफलता को बर्दाश्त नहीं कर पाते। ये दोनों ही स्थितियां उनके लिए घातक साबित होती हैं। ऐसे में खुशी एवं गम के बीच छात्रों को संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता होती है। इसी पर नमिता सिंह की रिपोर्ट

दसवीं एवं बारहवीं में पढ़ रहे कुछ स्टूडेंट्स के प्री बोर्ड के रिजल्ट तो मिल गए होंगे, जबकि कुछ के मिलने वाले होंगे। ऐसे में उनके दिलो-दिमाग में जबर्दस्त घमासान मचा होगा। कुछ खुशी के रथ पर सवार होकर प्रफुल्लित हो रहे होंगे, जबकि कुछ गम के दरिया में गोते लगा रहे होंगे। स्टूडेंट यह भूलने लग जाते हैं कि प्री बोर्ड के यह नतीजे सिर्फ संकेत भर हैं, उनकी असली परीक्षा तो आने वाले दिनों में होगी।

मार्क्स को लेकर न उलझें
यह जरूरी नहीं कि यदि आपके मॉर्क्स प्री बोर्ड में कम आए हैं तो आपकी सारी उम्मीदें वहीं खत्म हो गईं, बल्कि यह नतीजे तो आपको अलर्ट करने वाले हैं कि अब भी न चेते तो सब कुछ खत्म हो जाएगा।
अपने आप को काबू में करने का प्रयास करें।
अपने दिमाग को काबू करने से तात्पर्य यही है कि अच्छे मार्क्स आ जाने के बावजूद अपनी तैयारी एवं कोशिशों का दामन न छोड़ें। और बेहतर करने का प्रयास यूं ही करते रहें।

अपनी जिम्मेदारी स्वीकारें
आपके मार्क्स चाहे अच्छे हों या बुरे, इसकी जिम्मेदारी व्यक्तिगत तौर पर आपको स्वीकारनी पड़ेगी। आपकी दलील हो सकती है कि कुछ प्रश्नों का सही तरीके से जवाब देने के बावजूद मार्क्स अच्छे नहीं आए, आपने किस ढंग से तैयारी की या आपको सुविधाएं कितनी मिलीं। ये सब अब बीते समय की बातें हो गईं। इसके लिए कोई बहाना न ही बनाएं तो अच्छा होगा। किसी के ऊपर दोषारोपण करने से भी बात नहीं बन सकती, क्योंकि किसी भी प्रश्न का जवाब कई तरीके से दिया जा सकता है। अगर कहीं खामियां हैं तो जरूर वे आपके आंसरिंग स्टाइल या कांसेप्ट की कमी को दर्शाती हैं। जब तक आपको खुद की गलतियों का आभास नहीं होगा, आप सफलता की राह में आगे नहीं बढ़ सकते।

टीचर्स के साथ डिस्कस करें
सीबीएसई सहित कई बोर्डस ने अब आंसर सीट को घर ले जाने की छूट दी हुई है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि छात्रों को अपने प्रदर्शन को परखने का मौका मिलता है। वे यह जान सकते हैं कि उन्होंने क्या लिखा है तथा प्रश्न की प्रकृति कैसी थी। मार्क्स अच्छे हैं तो आपके लिए उत्साहजनक है, जबकि मार्क्स कम होने पर आंसर सीट लेकर स्कूल अथवा ट्य़ूशन टीचर से डिस्कस करें। इस दौरान कई सारी चीजें निकल कर सामने आएंगी। जिन प्रश्नों का उत्तर आप सटीक तरीके से नहीं दे पाए, उसे टीचर के जरिए क्लियर करें तथा जो भी कमियां हैं, उन्हें तत्काल दूर करने की कोशिश करें। यह भी जानें कि एग्जामिनर आपसे किस तरह के जवाब की उम्मीद करता है।

उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुईं
जिन छात्रों के मार्क्स प्री बोर्ड में कम आए हैं, उन्हें भी निराश होने की जरूरत नहीं है। अभी इतने दिन शेष हैं कि वे अपनी तैयारी को काफी हद तक तो नहीं, लेकिन कुछ हद तक जरूर पटरी पर ला सकते हैं। इसलिए प्री बोर्ड के नतीजों को अंतिम नतीजा न मान कर अपने अगले कदम के बारे में सोचिए। कई बार असफलताओं के बाद ही कामयाबी का रास्ता खुलता है।

सबसे बड़ी बात यह है कि प्री बोर्ड के मार्क्स फाइनल रिजल्ट में नहीं जोड़े जाते, लेकिन वे अपने पीछे एक संकेत जरूर छोड़ जाते हैं कि अभी आपको क्या-क्या करना है। छात्र अभी भी सफलता की इबारत लिख सकते हैं, बशर्ते उनका मन न हारा हो। याद रखें कि ‘मन के हारे हार है और मन के जीते जीत।’

स्टूडेंट के लिए जरूरी टिप्स
नतीजे सिर्फ संकेत हैं, असली परीक्षा अगले महीने है।
अच्छे मार्क्स आने के बावजूद कोशिशों का दामन न छोड़ें।
मार्क्स कम आने पर आंसरिंग स्टाइल का कांसेप्ट परखें।
जो भी कमियां आ रही हैं, उन्हें दूर करने का प्रयास करें।
कोई जल्दबाजी न दिखाएं तथा टाइम मैनेजमेंट सही रखें।

हौसले के दम पर मिलेगी जीत
सिलेबस पूरा कर चुके छात्रों के लिए सीबीएसई सहित प्रमुख बोर्डों के सैंपल पेपर सॉल्व करना सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। प्री बोर्ड का मतलब छात्रों को बोर्ड एग्जाम के लिए तैयार करना होता है। स्कूलों द्वारा भी स्टूडेंट के लिए एक्स्ट्रा क्लास एवं स्पेशल अटेंशन दी जाती है। रिवीजन के संदर्भ में मत यही है कि अब जब प्री बोर्ड के रिजल्ट स्टूडेंट के सामने हैं तो क्यों न उसी को फोकस करते हुए वे अपना रिवीजन करें। जिन सब्जेक्ट में कम मार्क्स आए हैं, उन पर अधिक समय खर्च करें तथा बड़े एवं उलझाऊ टॉपिक को छोटे-छोटे प्वाइंट्स में तोड़ लें।
पीसी बोस, पूर्व शिक्षा अधिकारी
सीबीएसई, दिल्ली

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