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पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा के लिए जारी होगा दिशा-निर्देश

नई दिल्ली। वरिष्ठ संवाददाता। राजधानी में रह रहे पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ बढ़ते अपराध को रोकने के लिए हाईकोर्ट मंगलवार को दिशा-निर्देश जारी करेगा। हाईकोर्ट ने दिशा-निर्देश का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी भारत सरकार के अतिरिक्त महाधविक्ता राजीव मेहरा को दी है।

चीफ जस्टिस एन. वी. रमन और जस्टिस राजीव सहाय एंडलॉ की पीठ ने राजधानी में रह रहे पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ बढ़ते अपराध को गंभीर चिंता का विषय बताया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि दिल्ली को सुरक्षित बनाने की जरूरत है ताकि देश के हर नागरिक को यहां आने और रहने का पर्याप्त मौका मिले।

पीठ ने यह भी कहा कि हमे समझना होगा कि दिल्ली सबकी है इसलिए यहां देश का कोई भी नागरिक रह सकता है। पीठ ने दिल्ली पुलिस वे पूर्वोत्तर सहित देश के अन्य राज्यों से आने वाले सभी लोगों की सुरक्षा सुनशि्चित करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा है कि पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ जिस तरह से अपराध बढ़ रहे हैं उसे देखते हुए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। हाईकोर्ट ने भारत सरकार के अतिरिक्त महाधविक्ता राजीव मेहरा से रातों-रात राजधानी में रहने वाले पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा के लिए जारी दिशा-निर्देश का मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया है।

पीठ ने दिशा-निर्देश जारी करने के लिए मंगलवार दोपहर बाद मसौदा पर अपना निर्णय देगा। इसके लिए हाईकोर्ट ने मेहरा को दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट और पूर्वोत्तर के लोगों के संगठन के सुझाव की प्रति भी मुहैया कराया है।

हालांकि इससे पहले दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त महाधविक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने एक कमेटी बनाई है और रिपोर्ट आने के बाद इस पर कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस ने पूर्वोत्तर की नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म मामले पर भी जवाब तलब किया है।

15 दिन से कम में नहीं मिलती है पोस्टमार्ट रिपोर्टवसिरेा रिपोर्ट आने में कम से कम एक साल और इससे अधिक का लगता है वक्तनई दिल्ली। राजधानी में पोस्टमार्ट रिपोर्ट मिलने में औसतन 15 दिन का वक्त लगता है जबकि वसिरेा रिपोर्ट साल भर से पहले नहीं मिलता है।

इसका खुलासा खुद दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में हलफनामा पेश करते हुए किया। जबकि केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के हिसाब से दो दिन यानी 48 घंटे के भीतर पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस के इस खुलासे पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। चीफ जस्टिस एन. वी. रमन और जस्टिस राजीव सहाय एंडलॉ की पीठ ने पोस्टामार्ट और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की कमी पर दिल्ली सरकार और पुलिस को एक बार फिर से फटकार लगाई है।

पीठ ने कहा कि आपराधिक मामलों में फॉरेंसिक रिपोर्ट समय पर नहीं आने की वजह से लोगों को अदालतों में मामले में लंबित रहते हैं। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से यह बताने के लिए कहा है कि क्या पोस्टमार्टम के लिए मौजूदा संसाधन पर्याप्त है।

राजधानी में फिलहाल 13 अस्पतालों में पोस्टमार्टम की व्यवस्था है। इनमें से तीन केंद्र सरकार का अस्पताल है। पुलिस ने कहा है कि राजधानी में औसतन 31.45 पोस्टमार्टम प्रतिदिन होते हैं। वर्ष 2012 में 11724 शव का पोस्टमार्टम हुआवर्ष 2013 में 11240 शव का पोस्टमार्टम हुआये आंकड़े सिर्फ उनका है जिसमें दिल्ली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।

इसके अतिरिक्त लवारशि शव और मेडिकल लापरवाही सहित अन्य मामलों में भी पोस्टमार्टम अलग होते हैं। सीबीआई फॉरेंसिक लैब में उपकरण की कमी, खरीद के लिए मसौदा केंद्र सरकार के पास तीन साल से विचाराधीनसीबीआई ने हाईकोर्ट को बताया कि उनके फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में जांच के लिए उपकरण की कमी है।

हलफनामा दाखिल करते हुए सीबीआई ने कहा है कि उपकरण की खरीद के लिए अक्टूबर 2011 में ही गृह मंत्रालय को पत्र लिखा गया है लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए गृह मंत्रालय को आड़े हाथों लिया है। इसके बाद मंत्रालय ने भरोसा दिया है कि जल्द ही उपकरण के खरीद के लिए सीबीआई के प्रस्ताव को जल्द मंजूरी देंगे।

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