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जनलोकपाल पर एलजी के सवाल

दिल्ली में सख्त लोकपाल कानून पारित कराने को लेकर दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच तकरार बढ़ गई है। नजीब जंग ने सोमवार को केजरीवाल को भेजे जवाब में स्पष्ट किया है कि कानून बनाने की प्रक्रिया में कोई कानून न टूटे इसलिए जनलोकपाल विधेयक पर सॉलिसिटर जनरल की राय ली गई थी। राजनिवास की ओर से कहा गया है कि अंतिम परामर्श के लिए विधेयक को केंद्रीय कानून मंत्रालय भेजा गया है।

एलजी से नहीं पूछा: उपराज्यपाल ने पत्र में कहा कि किसी भी नए विधेयक को कैबिनेट में लाने से पूर्व भी उपराज्यपाल की मंजूरी ली जाती है लेकिन यह मंजूरी क्यों नहीं ली गई।

राष्ट्रपति से भी पूछना था जरूरी: पत्र में कहा गया है कि केंद्र लोकपाल बिल पर काम कर रहा है। दिल्ली के कानून में ऐसी कई धाराएं हैं जिनमें केंद्रीय धाराएं भी शामिल हैं। इन धाराओं में यदि किसी प्रकार का बदलाव होता है तो उन पर राष्ट्रपति से मंजूरी ली जानी चाहिए थी। 

स्टेडियम में सत्र पर सवाल: जनलोकपाल विधेयक को पास करने के लिए उपराज्यपाल से सत्र 16 फरवरी को आईजीआई स्टेडियम में करने का आग्रह किया गया था। इसे उपराज्यपाल ने नामंजूर कर दिया है। तर्क है कि इसका जनता दरबार वाला हाल न हो जाए।

तीन विभागों की मंजूरी नहीं ली: कानून, वित्त व प्रशासन संबंधित संशोधन के लिए प्रावधान है कि उपराज्यपाल से मंजूरी ली जाए। लेकिन इस कैबिनेट ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

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