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विदेशी पक्षी भी दिल्ली में बना रहे आशियाना

दिल्ली में अपना आशियाना बनाना इंसानों को ही नहीं,  पक्षियों को भी रास आ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मध्य एशिया और उत्तरी एशिया से आने वाले कुछ प्रवासी पक्षियों ने दिल्ली में अपना स्थायी डेरा बना लिया है। एशियन वाटर वर्ड सेंसस (एडब्ल्यूसी) की रिपोर्ट में यह सामने आया है।
क्या है कारण: एडब्ल्यूसी दिल्ली के संयोजक टीके राय ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण, मौसम में बदलाव, घरेलू स्तर पर पर्यावरण से हो रही छेड़खानी और पानी के अनियमित स्तर की वजह से पक्षी एक जगह से दूसरी जगह कम जाने लगे हैं। राय के मुताबिक पक्षी इसलिए भी दूर नहीं जा रहे हैं क्योंकि इसके लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऐसे में वे अपने आसपास ही अनुकूल मौसम मिलने पर वहीं ठहरने लगे हैं। दिल्ली में नजफगढ़ सीवेज ड्रेन और हरियाणा की सीवेज ड्रेन में पक्षी अपना बसेरा बना रहे हैं। पिछली बार के मुकाबले नजफगढ़ ड्रेन में घरेलू, प्रवासी पक्षी और विलुप्त प्रजाति के पक्षियों की संख्या में इजाफा हुआ है। यहां पर पक्षियों की संख्या 3341 हो गई है। राय कहते हैं कि मौसम का मिजाज दुनिया के हर हिस्से में बिगड़ने लगा है। ऐसे में पक्षी एक बार डेरा बसाने के बाद बदल नहीं रहे हैं। यही वजह है कि सीवेज ड्रेन में भी वह अनुकूलता तलाश ले रहे हैं।

दिल्ली से दूर भी हुए पक्षी: दिल्ली में पानी के अनियमित स्तर, प्रदूषण और कंक्रीट की वजह से कुछ प्रवासी पक्षियों का आना कम भी हुआ है। दिल्ली की ओखला बर्ड सेंचुरी में प्रवासी पक्षी घटे हैं।

यहां घट रहे पक्षी: भारत में प्रवासी पक्षियों के लिए मशहूर असम के दीपोर बिल, त्रिपुरा की रुद्र सागर ड्रेन, पंजाब की रोपर, हरिटेक और कंजली वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों की आवाजाही लगातार कम हो रही है।

पंजाब-असम से भी हुए दूर: पंजाब में नदियों में रेत की वजह से पक्षी नहीं आ रहे हैं। असम में मौसम के बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव से पक्षी वहां से दूर हुए हैं।

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