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मैनहोलदूतम!

हे खुले हुए मैनहोल! कालिदास के जमाने में पैदा हुआ होता तो ये कष्ट तुम्हें हरगिज नहीं देता। उस जमाने में प्रेमिका को पैगाम भेजने के लिए मेघ अर्थात बादलों का सहारा ले लिया जाता था। आजकल के मेघ भी भरोसे लायक नहीं रहे। बिजली कहीं चमकाते हैं और बरसते कहीं हैं। हालांकि पैगाम को डाक मोबाइल या ई-मेल से भी भेजा जा सकता है लेकिन डियर, तुम जानते ही हो कि आजकल इन्हीं मेघों की कृपा से हमार यहां झमाझम बारिश हो रही है। लेटर बाक्स तक में पानी भर गया है। पोस्टमैन नाव मिले बगैर चिटिठयां बांटने को तैयार नहीं है। केबल में भी पानी चला गया है। इससे लैंड लाइन फोन डेड है और नेटवर्क न मिलने से मोबाइल भी काम नहीं करता है।ड्ढr ड्ढr ले- दे के बचे तुम। नगर निगम- जल संस्थान की बदौलत नलों को छोड़कर हर जगह पानी है। नालियां जाम हैं। नाले त्राहिमाम हैं। सिर्फ एक तुम ही खुले हुए हो। मैं जानता हूं कि जमीन के भीतर ही भीतर तुम दस किलोमीटर दूर रहने वाली मेरी माशूका के घर के नीचे से निकलते हो। अगर तुम्हार ऊपर माशूका के बाप ने ड्राइंगरूम न बनवा लिया होता तो कोई गरीब तुम्हारा ढक्कन बाजार में बेचकर ऐश कर रहा होता। तुम वहां हरहरा कर बास मार रहे होते।ड्ढr हे मेरी भावी ससुराल के अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट! एक पैगाम बोतल में बंद करके तुम्हें सौंपना चाहता हूं। देखो मना मत करना। मेर सपनों की रानी तुम्हार दूसर छोर पर टकटकी लगाए इस पैगाम की राह देख रही है। मेर निवेदन को चमचागिरी न समझना। असलियत ये है कि बिना मेर अर्थात मनुष्य के तुम्हरा वजूद क्या है। मनुष्य है तो पेट है और पेट है तभी तुम्हारी जरूरत है। कह सकते हो कि पेट तो जानवरों के भी होता है तो माई डियर बल्डीफूल! तुमने जानवरों को कभी डिब्बा लेकर जाते देखा है ?

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