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विभागीय आदेश को विभाग ही बता रहा धता

किसी कानून तोड़ने वाले से अगर आप इसका कारण पूछें तो वह तल्खी से जवाब देता है कि कानून बना ही है तोड़ने के लिए। ऐसे लोगों को असामाजिक तत्व की संज्ञा दी जाती है, पर यही कानून जब पुलिस विभाग के वरीय अधिकारी तोड़ने लगें तो उन्हें क्या कहा जाएगा! चौकिए नहीं कानून बनाने और तोड़ने की इस तल्ख सच्चाई का उदाहरण सामने है।ड्ढr ड्ढr बिहार सरकार के गृह (आरक्षी) ‘विभाग ने अपने संकल्प संख्या- 71दिनांक 24 जून 1ो एक आदेश निर्गत किया। इस विभागीय सरकारी आदेश में यह स्पष्ट निर्देश है कि पुलिस के किसी संघ या एसोसिएशन के निर्वाचित पदाधिकारी प्रिय पद यानी सर्किल, थाना या ओपी में पदस्थापन की सुविधा से शत प्रतिशत वंचित रहेंगे।’ जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि ‘एसोसिएशन एक कल्याणकारी संस्था है। अत: इसके निर्वाचित पदाधिकारी या प्रतिनिधि पुलिस लाइन में ही कार्यरत रहकर संघ के कल्याणकारी कार्यो का निष्पादन करंगे।’ सरकार का यह आदेश राज्य और राजधानी पटना के लिए महा कागजी आदेश ही साबित हो रहा है। बिहार पुलिस एसोसिएशन तथा पुलिस मेंस एसोसिएशन के कई पदाधिकारी, अधिकारियों के आदेश से प्रिय पद पर हैं।ड्ढr ड्ढr उदाहरणार्थ बिपुए के पटना जिला अध्यक्ष मुन्द्रिका प्रसाद जहां लगातार दो वर्षो तक गांधी मैदान थानाध्यक्ष रहने के बाद अब कोतवाली थानाध्यक्ष की कुर्सी की शोभा बढ़ा रहे हैं, वहीं कोषाध्यक्ष केदार सिंह पुलिस लाइन में एमटी सार्जेट के पद पर कार्यतरत हैं। संयुक्त सचिव राम खेलावन चौधरी की पदस्थापना ट्रैफिक में तो उपाध्यक्ष कृष्णा यादव कोतवाली थाना में पदस्थापित हैं। इसी तरह सचिव रणविजय सिंह गांधी मैदान थाना में हैं। यह तो हाल है कानून बनाने वालों की नाक के नीचे हो रहे खेल का। सूत्रों के अनुसार राज्य का कोई जिला और वहां पदस्थापित वरीय अधिकारी इस कानून को तोड़ने में पीछे नहीं है। इस संदर्भ में पूछे जाने पर वरीय अधिकारियों की स्थिति न उगलने और न निगलने वाली है। सीनियर एसपी अमित कुमार कहते हैं कि जहां तक उनकी समझ है तो जरूरत पड़ने पर संघ से जुड़े पुलिसकर्मियों की पोस्टिंग की जा सकती है पर वह इसे दावे के साथ नहीं कह सकते। उन्होंने कहा कि वह इस मामले और निर्देशों का फिर से अवलोकन कर विधिसम्मत कार्रवाई करंगे।ं

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