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दक्षिण की काशी है वाई

पंचगनी से नौ किलोमीटर पहले है शहर वाई। वाई से सतारा की दूरी 32 किलोमीटर है। यहां कृष्णा नदी के तट पर बना है वाई का गणेश मंदिर। वैसे वाई में कृष्णा नदी पर कुल सात घाट बनाए गए हैं, लेकिन इनमें सबसे प्रसिद्ध है गणपति आली घाट पर गणेश मंदिर। मंदिर में गणेश जी की विशाल प्रतिमा है, जो 10 फीट ऊंची और आठ फीट चौड़ी है। यह गणेश प्रतिमा एक ही पत्थर से बनाई गई है। ढोल्या गणपति के प्रति महाराष्ट्र के लोगों में अपार श्रद्धा है। मंदिर करीब साढ़े तीन सौ साल पुराना है। वैसे पूरा मंदिर परिसर पत्थरों का बना है, लेकिन गणेश मंदिर के गुंबद को पेंट कर रंगीन बना दिया गया है।

वाई के गणेश मंदिर का निर्माण श्रीमंत गणपत राव भीखाजी रास्ते ने 1762 में करवाया था। इसकी बगल में काशी विश्वनाथ मंदिर का भी निर्माण कराया गया है, इसलिए महाराष्ट्र के लोग इसे दक्षिण की काशी कहते हैं। गणेश मंदिर के आसपास कृष्णा नदी पर बड़े सुंदर स्नान घाट और पुल बनाए गए हैं। घाट और पुल काले पत्थरों से बने हैं। जब बारिश के दिनों में नदी में पानी बढ़ जाता है, तब घाट और छोटे पुल डूब जाते हैं। उस समय सिर्फ ऊंचे पुल से नदी पार की जा सकती है। गणेश मंदिर में सालों श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। खासतौर पर गणेश चतुर्थी के दिन मंदिर में भीड़ बढ़ जाती है।

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