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भूषण के खिलाफ कार्रवाई बदले की भावना से नहीं: वीरभद्र

भूषण के खिलाफ कार्रवाई बदले की भावना से नहीं: वीरभद्र

हिमाचल सतर्कता ब्यूरो ने आप नेता प्रशांत भूषण की 122 एकड़ जमीन जब्त करने की सिफारिश की है और इस संबंध में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बदले की भावना से कार्रवाई करने के आरोपों को खारिज किया है। ब्यूरो ने कहा कि प्रशासन ने 2012 में ही इस मामले में जांच शुरू कर दी थी, जब भाजपा सत्ता में थी।

ब्यूरो ने इसलिए जमीन जब्त करने की सिफारिश की है क्योंकि भूषण की कुमुद भूषण एजुकेशनल सोसायटी को आवंटित जमीन पर कोई स्कूल या कॉलेज नहीं है। ब्यूरो ने कहा कि सोसायटी ने नियमों को तोड़ा और जमीन जब्त किये जाने की जरूरत है।

सिंह ने बयान जारी कर कहा कि पालमपुर में चाय बागान की जमीन पिछली भाजपा सरकार ने भूषण की सोसायटी को दी थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने अपना राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव बनाने के लिए प्रभावशाली लोगों को अनुचित फायदा पहुंचाया था।

हालांकि सिंह के मुताबिक कांगड़ा के जिला कलेक्टर ने जमीन का इस्तेमाल नहीं होने और 2012 में शर्तों का उल्लंघन होने के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी। सोसायटी द्वारा दो साल में कोई शिक्षण संस्थान संचालित करने की अपेक्षा थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

वकील भूषण ने पिछले साल नवंबर में दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल कर मांग की थी कि जब वीरभद्र सिंह केंद्र में इस्पात मंत्री थे तब के भ्रष्टाचार के कथित मामलों में सीबीआई जांच कराई जाए।

सिंह ने कहा कि भूषण ने जनहित याचिका दाखिल कर उनके खिलाफ दुश्मनी और बदले की भावना से कार्रवाई की थी। कांग्रेस सरकार ने 2006 में चाय बागान खरीद के उनके मामले को खारिज कर दिया था क्योंकि नियमों के तहत इसकी इजाजत नहीं थी।

भूषण की प्रतिक्रिया नही ली जा सकी लेकिन कल उन्होंने सतर्कता रिपोर्ट को दुर्भावनापूर्ण करार देते हुए कहा था कि यह अदालत में टिक नहीं पाएगी। उन्होंने आरोपों का बचाव करते हुए कहा कि दो साल में संस्थान बना पाना असंभव है। उन्होंने सिंह पर बदलने की भावना से काम करने का आरोप लगाया क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल की थी।

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