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जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने वालों पर कार्रवाई हो: चिदंबरम

जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने वालों पर कार्रवाई हो: चिदंबरम

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जोखिम वाले ऋणों में हो रही बढ़ोतरी के मद्देनजर बैंकों से जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वालो के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की अपील करते हुये कहा है कि बैंकों को अर्जित लाभ का कुछ हिस्सा पूंजी निवेश के लिए भी रखना चाहिए।

चिदंबरम ने सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन ओवरसीज बैंक के 78वें स्थापना दिवस पर सोमवार को कहा कि बैंकों को गैर निष्पादित संपत्तियों पर ध्यान देना चाहिए और जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने वालों की पहचान करनी चाहिए तथा उनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

हालांकि उन्होंने कहा कि मंदी की वजह से कारोबार में कमी आने से ऋण नहीं चुकाने वाले सही लोगों की मदद की जानी चाहिए ताकि वे समय पर ऋण चुका सके। उन्होंने कहा कि जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वालों के प्रति सहानुभूति दिखाने की जरूरत नहीं है। ऐसे ऋण को गैर निष्पादित संपत्तियों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है क्‍योंकि ऐसी स्थिति में ऋण लेने वाला समृद्ध और ऋणदाता गरीब हो जाता है।

सरकारी बैंकों की मार्च 2013 में गैर निष्पादित संपत्तियां कुल1.83 लाख करोड़ रुपये थी जो सितंबर 2013 में 28.5 प्रतिशत बढ़कर 2.36 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई। मार्च 2011 में कुल एनपीए 94121 करोड़ रुपये था जो मार्च 2012 में 1.37 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। मार्च 2011 की तुलना में सितंबर 2013 में कुल एनपीए बढ़कर दोगुना हो गया है। 

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