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दिल्ली पहुंचने के लिए पार्टियों ने यूपी में झोंकी ताकत

दिल्ली पहुंचने के लिए पार्टियों ने यूपी में झोंकी ताकत

लोकसभा चुनाव में सभी पार्टियों की उम्मीद उत्तर प्रदेश में टिकी है। दिल्ली की गद्दी तक पहुंचने के लिए सभी पार्टियां यूपी में ज्यादा से ज्यादा सीट जीतना चाहती हैं। पर मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगों ने सियासी पार्टियों का गणित बिगाड़ दिया है। पश्चिमी यूपी में समाजवादी पार्टी को साइकिल पिछड़ने का डर है, वहीं राष्ट्रीय लोकदल का जाट-मुस्लिम समीकरण टूटने से पार्टी को झटका लग सकता है। भाजपा और बसपा खुद को सियासी फायदे में मानते हैं, पर आम आदमी पार्टी खेल बिगाड़ सकती है।

भाजपा को मिशन 272 का लक्ष्य हासिल करने के लिए यूपी में अधिक से अधिक सीट जीतना बेहद जरुरी है। पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी कई जनसभाएं कर माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यूपी में हार-जीत के फैसले में मुसलिम मतदाता अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए नरेंद्र मोदी दंगा रहित प्रदेश की बात कर मुसलमानों का भरोसा जीतने में जुटे हैं।

सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव तीसरा मोर्चा की सरकार बनने की स्थिति में प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं। इसलिए पार्टी मुजफ्फरनगर दंगों का जख्म भरने में जुटी है, पर चुनाव में सपा को विधानसभा की तरह मुस्लिम वोट नहीं मिल पाएगा। बसपा बेहद शांत तरीके से अपने कैडर को एकजुट कर रही है। बसपा के पास 21 सीटें है, उसे उम्मीद है कि वह अपना आंकड़ा बढ़ाने में सफल रहेगी।

सबसे ज्यादा मुश्किल कांग्रेस के सामने हैं। पार्टी के लिए 2009 का प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दूसरी पार्टियों की सीट में इजाफा कांग्रेस के बुनियाद पर ही होगा। ऐसे में पार्टी की सीट घटना तय है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी भी चुनाव में एक अहम भूमिका निभाएगी।

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