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बीसीसीआई प्रमुख का दामाद सट्टेबाजी में लिप्त: जांच रिपोर्ट

बीसीसीआई प्रमुख का दामाद सट्टेबाजी में लिप्त: जांच रिपोर्ट

उच्चतम न्यायालय को उच्च स्तरीय समिति ने सूचित किया कि भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन की चेन्नई सुपर किंग्स के अधिकारी के रूप में और आईपीएल मैचों के दौरान सट्टेबाजी में संलिप्पता साबित होती है।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मुकुल मुदगल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने आज अपनी रिपोर्ट न्यायालय को सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया है, चेन्नई सुपर किंग्स में टीम के अधिकारी के रूप में गुरुनाथ मयप्पन की भूमिका और मयप्पन के खिलाफ सटटेबाजी के आरोप तथा सूचना लीक करने के आरोप साबित हुये हैं।

जांच समिति ने कहा कि फिक्सिंग के आरोपों की आगे जांच की आवश्यकता है। इस समिति के अन्य सदस्यों में अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एन नागेश्वर  राव और असम क्रिकेट एसोसिएशन के सदस्य नीलय दत्ता शामिल हैं।

मयप्पन के सिर्फ क्रिकेट प्रेमी होने के श्रीनिवासन का दावा ठुकराते हुये समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि समिति की राय है कि रिकार्ड में उपलब्ध सामग्री से स्पष्ट संकेत मिलता है कि मयप्पन ही चेन्नई सुपर किंग्स का चेहरा और इस टीम के अधिकारी थे।

न्यायमूर्ति ए के पटनायक और न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ की खंडपीठ ने मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के मालिकों के खिलाफ सट्टेबाजी और स्पाट फिक्सिंग के आरोपों की जांच के लिये तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। शीर्ष अदालत ने समिति से कहा था कि इन आरोपों की जांच कर वह अपनी रिपोर्ट पेश करे।

समिति की रिपोर्ट ने राजस्थान रायल्स के राज कुन्द्रा के खिलाफ सट्टेबाजी और स्पाट फिक्सिंग के आरोपों पर आगे जांच करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर क्रिकेट प्रा लि के मालिक राज कुन्द्रा के खिलाफ सटटेबाजी और स्पाट फिक्सिंग के आरोपों की और की जांच आवश्यकता है।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि दिल्ली और चेन्नई पुलिस से मिली जानकारी, मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी और आरोप पत्र, टेलीफोन पर हुयी बातचीत की प्रतिलिपि से यही निष्कर्ष निकलता है कि बिन्दू दारा सिहं, जो विक्रम अग्रवाल जैसे सट्टेबाज और पंटर के सीधे संपर्क में था,  की मार्फत मयप्पन सटटेबाजी में लिप्त था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मयप्पन द्वारा चेन्नई सुपर किंग्स के पक्ष में ही नहीं बल्कि उसके खिलाफ भी बोली लगायी जाती थी। सट्टेबाजी के धंधे में किसी टीम के पक्ष या खिलाफ सट्टा लगाने को बचाव वाला सटटा भी कहा जाता है। मयप्पन ने चेन्नई सुपर किंग्स के अलावा भी दूसरी टीमों के मैचों पर सटटा लगाया था।

रिपोर्ट के अनुसार, जहां तक मयप्पन और बिन्दु दारा सिंह की भूमिका का सवाल है, हमारा निष्कर्ष पुलिस की गवाही और आरोप पत्र पर आधारित है और यह किसी भी तरह इस मसले पर कोई निर्णय नहीं देता है कि क्या मयप्पन और सिंह इन आरोपों के दोषी है जो कि पूरी तरह से आपराधिक अदालत के दायरे में आता है।

समिति ने कहा कि हमारा निष्कर्ष पूरी तरह जांच के दौरान एकत्र किये गये तथ्यों और आरोप पत्र तथा जांच एजेन्सी द्वारा पेश दूसरे दस्तावेजों पर आधारित है। समिति ने श्रीनिवास के खिलाफ हितों के टकराव के मसले पर भी गौर किया लेकिन उसने कोई टिप्पणी करने की बजाये इस मसले को शीर्ष अदालत के विचारार्थ छोड़ दिया।

समिति ने क्रिकेट में कदाचार की रोकथाम के लिये अनेक उपायों की सिफारिश भी की है। समिति ने कहा है कि सचिन तेन्दुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण, वेंकटेश प्रसाद ओर अनिल कुंबले जैसे खिलाड़ियों को विभिन्न टीमों और युवा खिलाड़ियों को इन कदाचारों के बारे में आगाह करना चाहिए।

न्यायालय इस मसले पर बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ बीसीसीआई और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार की अपीलों पर सुनवाई कर रहा है। उच्च न्यायालय ने बीसीसीआई के जांच दल को गैर कानूनी घोषित कर दिया था।

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