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जौनसारी नृत्य और गीत बने आकर्षण का केन्द्र

 ऋषिकेश। हमारे संवाददाता। जौनसार बावर माघ महोत्सव में लोक नृत्य और गीतों में जौनसार की पौराणिक सभ्यता व परम्परा झलकती नजर आयी। इस दौरान जौनसार मूल के लोगों ने जौनसारी सभ्यता व संस्कृति पर अपने विचार भी प्रस्तुत किए। रविवार को प्रगति वहिार स्थित उत्सव गेस्ट हाउस में जौनसार बावर माघ महोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें तीर्थनगरी में रह रहे जौनसार मूल के लोगों द्वारा संगठित होकर हारूल, तांदी, जैता, रासो, जंगबाजी और पांडव नृत्य प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कशिन सिंह ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य आज की पीढ़ी को जौनसार की संस्कृति और सभ्यता से रूबरू कराना है। ताकि वे आज के औद्योगिक युग में भी अपनी लोक संस्कृति से जुड़े रहें। इस अवसर पर बुद्धि सिंह राणा, सुनील पांडे्य, पीसी जोशी, हरशि राणा, बलवंत सिंह राणा, सुरेन्द्र सिंह चौहान, एमएस सिंह चौहान, रतन सिंह तोमर, मुन्ना राठौर, आनंद सिंह, जगत सिंह, चतर सिंह, सोबत सिंह शाह, दिनेश चौहान, दिलीप सिंह, सुरेंद्र सिंह, धर्मचन्द्र, हुकुम सिंह, सुनील, जयपाल, प्रेमलता, नरेश तोमर, शांति रावत, निर्मल जोशी, राजेन्द्र चौहान, कुंदन सिंह नेगी, अजय, विदेश चौहान, पीयूष चौहान, गजेन्द्र चौहान, मायराम चौहान, दिनेश, बालाराम जोशी, धीरज, वीरेन्द्र नेगी, पल्लव चौहान, पंचराम शर्मा, मुकेश चौहान, अनिल, कृपाराम, राजेन्द्र जोशी, मातवर सिंह, तिरेपन सिंह व दौलतराम आदि उपस्थित थे।

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