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राजधानी की नयी रेक में भी जर्जर कोच

रांची। रघुनाथ झा। पांच दिन पहले राजधानी एक्सप्रेस को मिली नयी रेक पुरानी है। अत्याधुनिक जर्मन तकनीक से बने एलएचबी कोच के सभी श्रेणी के डब्बे पुराने है। कोच के दरवाजे ढीले और बेकार है। शौचालय के फ्लस तक गायब हैं। कोचों में कई खामियां हैं। रविवार को दिल्ली से रांची आने के क्रम में इसके पैंट्रीकार का फ्रीज भी खराब थे। पैंट्रीकार के कर्मियों ने बताया कि यह फ्रीज दिल्ली से आने के बाद ही खराब हो गया था।

यहां कोई सुधार नहीं हुआ। इसके कारण यात्रियों को खाना-परोसने में काफी दिक्कत हुई। पुरानी रेक देख हरी झंडी दिखाने का कार्यक्रम टलारेल सूत्रों के अनुसार झारखंड को मिली नयी रेक मुंबई को दे दी गयी है। यहां आयी रेक मुंबई दिल्ली के मार्ग पर चल रही थी। बोर्ड ने रांची की नयी रेक को वहां भेजकर उसकी पुरानी रेक को रांची भेज दिया गया। रेल अधिकारियों ने जब इसका मुआयना किया तो अवाक रह गए। बोर्ड के इस हरकत पर कोई भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं है।

अधिकारियों ने नयी रेक आने के लिए तैयारियां भी की थी, लेकिन जब पुरानी रेक देखी तो हरी झंडी दिखाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया। एक नहीं कई खामियांगोमो रुट पर चलनेवाली इस ट्रेन के कोच नंबर सात में एटेंडेंट के बैठने की सीट गायब है। जबकि इसके दरवाजे भी उखड़े हुए हैं। कोच नंबर बी आठ में लगे फायर इन्स्टीगीजर के उपयोग अवधि का उल्लेख नहीं है। कोच नंबर बी तीन के सीलिंग लाइट के कवर भी गायब हैं।

इतना ही नहीं पैंट्रीकार के नल का पाइप लीकेज है जिससे केबिन में पानी फैल जाता है। इससे पैंट्रीकार कर्मियों को काफी परेशानी होती है। बरकाकाना की कोच और भी बदतरबरकाकाना रूट में भी यात्रियों की सुविधाएं पुरानी से भी बदतर है। नयी रेक के ए श्रेणी के कोच के शाौचालय की स्थिति काफी बदतर है। इसकी छिटकिनी टूटी हुई है। थर्ड एसी कोच के उपर के सीटों की रेलिंग भी ढीले हैं जिससे रात में ऊपर सोए यात्री के नींद में लुढ़ककर गिरने का खतरा बना रहता है।

सोने के लिए गीले कंबल कभी-कभी तो ठंड के दिनों में यात्रियों को गीले कंबल और बिस्तर दे दिए जाते हैं। दिल्ली से चलने के बाद जब यात्री इसे इस्तेमाल करने के लिए स्पर्श करते है तो पता चलता है कि यह गीला है। राजधानी के यात्रियों के किराए कई बार बढ़ाए गए, लेकिन सुविधाएं लगातार गिरती जा रही है। झारखंड के साथ बेमानी: पैसेंजर एसोसिएशनयात्री संगठन पुरानी रेक के बदले नए रेक की मांग करेंगे। झारखंड पैसेंजर एसोसिएशन के प्रेम कटारुका के अनुसार उनके मुताबिक रेलवे के अन्य रूट पर इस्तेमाल की हुई पुरानी रेक देकर रेलवे बोर्ड ने एक बार फिर झारखंड को छला है।

जेडआरयूसीसी मेंबर अशोक नागपाल ने कहा कि इतना इंतजार के बाद पुरानी कोच देना झारखंड के साथ बेईमानी है। इसका विरोध किया जाएगा।

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