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गुरु तैयार, चेले हुए फरार

गुरु तैयार हैं और चेले फरार हैं! अब समस्या यह है कि बाढ़ से बचाव के उपाय किन्हें सिखाया जाए। दरअसल सरकार की योजना है कि बाढ़ जैसी आपदा में बचाव कार्य के लिए ग्रामीणों की मदद ली जाए। इसके लिए उन्हें ट्रनिंग भी दी जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स की टीम दस जिलों में पहुंच भी चुकी है। टीम पहुंच रही है इसकी सूचना भी सभी संबंधित जिलों के डीएम को पहले ही दी जा चुकी है।ड्ढr ड्ढr पर, जो बातें सामने आ रही हैं उससे यह लगने लगा है कि रिस्पांस फोर्स की पहल पर जिलों में बैठे अफसर ‘रिस्पांड’ नहीं कर रहे। एकाध जिले को छोड़ दें तो बाकी जिलों में ट्रनिंग को लेकर कोई सुगबुगाहट भी नहीं दिख रही। प्रखण्ड स्तर पर वॉलेंटियर तैयार किए जाने हैं और उनके चयन की जिम्मेवारी बीडीओ को सौंपी गयी है। पर, आपदा जैसे गंभीर मसलों पर भी कुछ अफसरों के तेवर और नखर से सरकार परशान है। बेगूसराय जिले के एक प्रखण्ड के बीडीओ ने तो एनडीआरएफ की टीम से यहां तक कह डाला कि 23 जून तक उनके पास ‘फुर्सत’ ही नहीं है। अब जब वॉलेन्टियर ही नहीं मिलेंगे तो टीम ट्रिनग किसे देगी? और तो और जिन पंद्रह जिलों में ट्रनिंग होनी है वहां एनडीआरएफ की टीम के खाने-पीने और रहने के लिए डीएम को 10-10 हजार रुपए एडवांस भी दिए जा चुके हैं। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत ट्रनिंग का कार्यक्रम एक महीने विलंब से चल रहा है। अभी तक सिर्फ मधुबनी जिले से ही सरकार को यह सुखद समाचार मिल पाया है कि वहां ट्रनिंग शुरू हो गयी है। अब चिंता इसबात की है कि बाढ़ आने के पहले जुलाई तक कैसे ट्रिनग पूरी हो जाए और बचाव कार्य के लिए वॉलेन्टियर तैयार हो जाएं।

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