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ओलंपिक और रूस का लोकतंत्र

आधुनिक ओलंपिक का मूल मकसद है शांति को विस्तार देना। न केवल राष्ट्रों के बीच, बल्कि मेजबान राष्ट्र के अंदर भी। सोच्चि में ओलंपिक विंटर गेम्स के रंगारंग शुभारंभ के साथ अब सबका ध्यान कुछ खास खेलों की तरफ होगा। लेकिन ये खेल शांति की स्थापना व विस्तार के लिए क्या करेंगे, विशेषकर रूस के अंदर? कॉकसस क्षेत्र से अब भी आतंकी खतरे खत्म नहीं हुए हैं। रूस में लोकतंत्र खंडित हो चुका है। कई असंतुष्टों को जेल में डाल दिया गया है। ऐसे में, अब जब दुनिया की निगाहें दो हफ्ते तक विंटर स्पोर्ट्स के लिए रूस पर टिकी होंगी, तब ओलंपिक परिवर्तन के उत्प्रेरक का काम कर सकता है। कुछ हद तक पहल शुरू हो चुकी है। जैसे अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के दबाव के कारण रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अपने इस फैसले से पीछे हटना पड़ा कि ओलंपिक खेल के दौरान प्रदर्शनकारियों पर प्रतिबंध लगेगा।

अपनी सुविधा के अनुसार, उन्होंने कुछ बड़े नामों को जेल से रिहा भी किया है। इसमें पूर्व विरोधी और ऑयल टायकून मिखाइल खोदोर्कोवस्की शामिल हैं। पुसी रॉयट्स और ग्रीनपीस के प्रदर्शनकारी भी हैं। पुतिन इस ओलंपिक के संदर्भ में कहते हैं कि इससे रूसी नागरिकों में प्रसन्नता आएगी और वे उनके पीछे एकजुट होंगे। विशेषकर तब, जब रूसी एथलीट ज्यादा स्वर्ण पदक बटोरेंगे। साफ है, रूस की छवि को प्रोजेक्ट करने में इस आयोजन का विशेष योगदान रहेगा और इससे देश की मंद पड़ती अर्थव्यवस्था में भी उछाल आएगा। लेकिन रूसी लोग इस बात से चिंतित हैं कि अनुमानत: 51 बिलियन डॉलर इन खेलों के आयोजन पर खर्च हुए। यह राशि ओलंपिक के इतिहास में बहुत बड़ी है। गेम्स के दौरान आतंकी हमलों की आशंका भी है। 37,000 सुरक्षा बल आतंकियों से निपटने के लिए तैनात किए गए हैं। इससे अपनी सीमा के भीतर रूस की कमजोरी का पता चलता है। स्थानीय लोग इस बात से नाराज हैं कि उनके क्षेत्र में पर्यावरण-असंतुलन को न्योता दिया गया है। सोच्चि ओलंपिक के कारण संभव है कि रूसी राजनीतिक कार्यकर्ताओं को खर्चों में फिजूलखर्ची व भ्रष्टाचार दिखे, और इससे उनके विरोध को नई ऊर्जा मिलेगी।  
द क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर, अमेरिका

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