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जिंदगी बचाने की एक युवा मुहिम

जिंदगी की सही कीमत का अंदाजा जिस पल हो जाता है, उसी क्षण से व्यक्ति अपने और दूसरे के जीवन को गंभीरता से लेने लगता है। ऐसे ही एक एहसास के साथ दिल्ली आईआईटी के छात्रों ने खास पहल की है, आइये जानें


‘जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे दोस्त को बचाने के लिए संबंधित ब्लड ग्रुप का खून उपलब्ध कराना कितना मुश्किल है, इसका अंदाजा 2010 में मालूम चला। रात करीब एक बजे दिल्ली के ज्यादातर ब्लड बैंक में फोन करने के बाद जब खून नहीं मिला तो एक समय लगा कि अब दोस्त को नहीं बचा पाऊंगा, लेकिन आईआईटी के छात्रों की मदद से हमनें उसे बचा ही लिया। यही एहसास था, जिसने ब्लड कनेक्ट जैसे ग्रुप को शुरू करने के लिए मुझे प्रोत्साहित किया।’ ऐसा कहना है ब्लड कनेक्ट ग्रुप को आईआईटी दिल्ली से शुरू करने वाले नितिन गर्ग का। नितिन कहते हैं, ‘आज दिल्ली समेत देश के कई आईआईटी के छात्र इस मुहिम के साथ जुड़कर सालाना हजारों लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। आईआईटी दिल्ली के छात्रों द्वारा बनाया गया यह ग्रुप देश में एक मात्र ऐसा समूह हैं जो आपातस्थिति में लोगों को खून की आपूर्ति कराने का काम कर रहा है।

दूसरे राज्यों में भी काम करेगा नेटवर्क
आईआईटी दिल्ली के छात्र आपातस्थिति में राजधानी के छह सरकारी अस्पतालों में खून की आपूर्ति कर रहे हैं। आपातस्थिति में चौबीसों घंटे खून की आपूर्ति करने के लिए ब्लड कनेक्ट ग्रुप से जुड़े छात्रों ने विशेष हेल्प लाइन, वेबसाइट व ब्लड कनेक्ट के नाम से फेसबुक पर एक एकाउंट भी बनाया है, ताकि जरूरतमंद इनके माध्यम से अपनी जरूरत को वाकिफ करा सकें। खास बात यह कि पिछले कुछ दिनों में आईआईटी के छात्रों ने अपने ग्रुप का दिल्ली समेत अन्य राज्यों और वहां के कई शहरों में विस्तार किया है। इसी कड़ी में दिल्ली विश्वविद्यालय समेत बाहर के कई विश्वविद्यालयों के कुछ बड़े कॉलेजों के छात्रों को भी इस ग्रुप से जोड़ा गया है, जहां आईआईटी के छात्र समय-समय पर दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य राज्यों में भी रक्तदान शिविर का भी आयोजन कराते हैं। यहां से एकत्रित किये गये खून को संबंधित इलाके के कुछ चुनिंदा सरकारी अस्पतालों तक पहुंचा दिया जाता है। इस तरह से यह ग्रुप अप्रत्यक्ष रूप से कई लोगों की जिंदगी बचाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।

ब्लड कनेक्ट प्रमुख सुमंत चिंतला ने बताया कि हमारा उद्देश्य युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित करना है। आपातस्थिति में एक विशेष ग्रुप ब्लड को ढूंढ़ निकालना बहुत बड़ी चुनौती बन जाती है। हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं। हम दिल्ली के छह बड़े सरकारी अस्पतालों से संपर्क में रहते हैं। इसके लिए हमने अपनी एक हेल्पलाइन भी शुरू की है, जिससे लोग मदद मांग सकते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के अलावा अब आईआईटी कानपुर के छात्र भी जुड़ गए हैं। हमने चंडीगढ़, जोधपुर, कोलकाता और जयपुर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों को भी अपने साथ शामिल किया है। जहां आगे आने वाले समय में रक्तदान शिविर से लेकर कई जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जाएगा, साथ ही आईआईटी केंद्रों के अलावा स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों को इससे जोड़ने की योजना है।
प्रस्तुति : साकेत कुमार

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