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रैलियों में भावी सहयोगियों पर नजर

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी चुनावी रैलियों में मतदाताओं को लुभाने के साथ चुनाव बाद के संभावित सहयोगी दलों पर भी डोरे डाल रहे है। हैदराबाद में चंद्रबाबू नायडू व कोलकाता में ममता बनर्जी की तारीफ करने के बाद गुवाहाटी में अगप व चेन्नई मे अन्नाद्रमुक पर कोई टिप्पणी न कर सकारात्मक संकेत दिए है।

तीसरे मोर्चे की कवायद के चलते उन्होंने अगप व जयललिता की तारीफ नहीं की। उनका अगला मुकाम भुवनेश्वर है, जहां राजग के पूर्व सहयोगी नवीन पटनायक की सरकार है।  चुनाव बाद की रणनीति में भाजपा की नजर आधा दजर्न क्षेत्रीय दलों पर है जो जरूरत पड़ने पर सरकार बनाने में सहयोगी बन सकें।

मोदी ने हैदराबाद की रैली में तेलुगुदेशम की तारीफ की थी। उन्होंने कोलकाता में ममता बनर्जी की सरकार के भी कसीदे काढ़े। गुवाहाटी व चेन्नई की रैलियों में मोदी कांग्रेस पर तो जमकर बरसे, लेकिन क्षेत्रीय दलों के प्रति नरमी रखी। मोदी 11 फरवरी को भुवनेश्वर में होंगे, जहां वे नवीन पटनायक के प्रति भी इस तरह से संकेत देंगे। हरियाणा में हजकां के साथ गठबंधन के बावजूद मोदी इनेलो के प्रति भी नरम रुख रखेंगे।

कांग्रेस विरोधी दलों पर निगाह: पार्टी के एक बड़े नेता के मुताबिक भाजपा 200 सीटों को जीतने की स्थिति में है। उसके अपने मौजूदा सहयोगी भी 25 सीटों की क्षमता रखते है, जबकि इन पांच क्षेत्रीय दलों की ताकत 75 सीटों की होगी।

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