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एआईएफएफ को आईओए चुनावों में भाग लेने से रोका गया

एआईएफएफ को आईओए चुनावों में भाग लेने से रोका गया

अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ को अपने प्रतिनिधियों के नाम भेजने के लिए उचित प्रक्रिया नहीं अपनाने के कारण रविवार को यहां भारतीय ओलंपिक संघ की विशेष आम सभा की बैठक और चुनावों भाग लेने से रोक दिया गया।

एआईएफएफ ने आईओए जीबीएम के लिए तीन प्रतिनिधियों कुशाल दास, बी एम मेहता और अनिल कामथ के नाम भेजे थे। दास के अस्वस्थ होने के कारण एआईएफएफ कोषाध्यक्ष हरदेव जडेजा आज की बैठक में हिस्सा लेने के लिए आए थे।

लेकिन आईओए ने उन्हें राष्ट्रीय फुटबॉल संस्था के प्रतिनिधियों के रूप में स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। उसका कहना था कि अधिकत पत्र में उनके अध्यक्ष या महासचिव के हस्ताक्षर नहीं हैं। एआईएफएफ ने दावा किया कि महासचिव कुशाल दास ऑपरेशन के बाद अस्पताल में होने के कारण पिछले एक महीने से कार्यालय नहीं आए और इसलिए उनके हस्ताक्षर नहीं लिए जा सके।

जडेजा ने पत्रकारों से कहा कि हमने अधिकत पत्र को छोड़कर सारी प्रक्रिया अपनायी थी। कुशाल दास के अस्पताल में होने के कारण वह हस्ताक्षर करने की स्थिति में नहीं थे और इसलिए सहायक महासचिव ने इसमें हस्ताक्षर किये। हमने 20 जनवरी की समयसीमा तक अपने प्रतिनिधियों के नाम भेज दिए थे।

आईओए के अधिकारी और हॉकी इंडिया के महासचिव नरिंदर बत्र ने हालांकि एआईएफएफ के तर्क को नामंजूर कर दिया और कहा कि नियमों का कड़ायी से पालन किया जाएगा।

बत्र ने कहा कि यह एआईएफएफ की गलती है। प्रतिनिधियों को नामित करने वाले पत्र में उनके अध्यक्ष या महासचिव के हस्ताक्षर नहीं हैं और इसलिए हमने उन्हें जीबीएम में भाग लेने की अनुमति नहीं दी। आईओए के किसी अधिकारी ने नहीं बल्कि चुनाव आयोग ने ऐसा किया जिसमें उच्च न्यायालय के सेवानिवत न्यायाधीश हैं। हम नियमों का सख्ती से पालन करेंगे।

एआईएफएफ ने दावा किया कि आईओए स्वयं उचित प्रक्रिया नहीं अपना रहा है क्योंकि उसने महासंघों को केवल ईमेल से प्रतिनिधियों के नाम भेजने के लिए कहा था।

एआईएफएफ के एक अधिकारी ने कहा कि उन्होंने हमें ईमेल से अपने प्रतिनिधियों को नामित करने के लिए कहा जबकि आईओए के संविधान में कहा गया है कि इस तरह का संवाद पंजीकृत डाक से किया जाना चाहिए। हमने ईमेल के जरिये जवाब दिया और इसमें अपने प्रतिनिधियों के नाम भी नत्थी कर दिए थे। पिछली तीन चार जीबीएम से हम यही कर रहे हैं और इस बार भी कोई मुद्दा नहीं था।

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