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विजिलेंस को दिए सिर्फ 6 महीने के कागजात

 इलाहाबाद कार्यालय संवाददाता। ट्रांसफर के बाद से गायब कर्मचारी के खाते में वेतन भेजकर घोटाला करने वाले रेलवे कार्मिक विभाग के कर्मचारी अब विजिलेंस टीम को दस्तावेज देने में हीलाहवाली कर रहे हैं। शनिवार को मामले की पड़ताल करने विजिलेंस टीम जब डीआरएम दफ्तर पहुंची तो उसे महज छह महीने के वेतन ट्रांसफर के दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। बाकी के दस्तावेज देने के लिए कुछ दिन की मोहलत मांगी गई है।

कानपुर में तैनात बुकिंग क्लर्क प्रेम नारायण शर्मा का ट्रांसफर दसिंबर 2012 में कानपुर से मिर्जापुर कर दिया गया। उसने अब तक मिर्जापुर में ज्वाइन नहीं किया। जबकि उसके कानपुर के पंजाब नेशनल बैंक के खाते में लगातार वेतन भेजा जा रहा था। जानकारी होने पर शुक्रवार को विजिलेंस टीम डीआरएम दफ्तर पहुंची और आलमारी सीज कर दी। विजिलेंस टीम ने दस्तावेज तलब किए तो बताया गया कि कार्मिक विभाग का संबंधित क्लर्क शुक्रवार को छुट्टी पर है। जब टीम ने बाबू को शनिवार को बुलाया तो उसने छह महीने के ही दस्तावेज टीम को दिए।

विजिलेंस की आरएन सिरोठिया और पीके पांडेय की टीम के सामने बाबू ने बताया कि बाकी फिलहाल नहीं है, उसे ढूंढना पड़ेगा। मामले में कानपुर के कार्मिक विभाग के कर्मचारियों, इलाहाबाद डीआरएम ऑफिस के कार्मिक विभाग के अफसरों और कर्मचारी यूनियन के एक नेता पर भी टीम को संदेह है। और भी मामले एक केस के आधार पर ऐसे तमाम मामले खंगाले जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ऐसे तमाम मामले हैं, जिनमें यह खेल हो रहा है।

इन मामलों में अफसरों के साथ कर्मचारी भी शामिल हैं। ऐसे तमाम घोटाले इस केस की जांच में सामने आएंगे।

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