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च्वायस बता ले जाइए बीडीओ

‘च्वायस और ऑप्शन’ बताइए और पसंद का बीडीओ पाइए! प्रखण्डों में बीडीओ की तैनाती का यह नया फामरूला राज्य सरकार का है। एमएलए अपनी पसंद बताएंगे और उसके अनुसार अधिकारियों की पोस्टिंग कर दी जाएगी। इसमें ‘क्षेत्र’ और वहां के ‘समीकरण’ का भी ध्यान रखा जाएगा। हां, खतरा इतना जरूर होगा कि अगर बीडीओ भ्रष्ट होगा तो उसकी जवाबदेही भी संबंधित जनप्रतिनिधि की ही होगी जिन्होंने उसका नाम प्रस्तावित किया था। सरकार उन्हें बाद में यह कहने का मौका नहीं देना चाहती कि बीडीओ घूस लेता है या काम नहीं होने देता।ड्ढr ड्ढr इसलिए जो होगा उनसे पूछ कर ही होगा। ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा इन दिनों जनप्रतिनिधियों से ऑप्शन मांग रहे हैं। इसी सिलसिले में विधानसभाध्यक्ष उदयनारायण चौधरी से भी पूछा गया है कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में कैसा और किन्हें बीडीओ के तौर पर देखना चाहते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में जनप्रतिनिधियों को कई ऑप्शन भी दिए गए हैं। मसलन जनप्रतिनिधि से पसंद के अफसरों के नाम पूछे जा रहे हैं। उनके पास अगर नाम नहीं है तो सिर्फ ‘समीकरण’ बताने से भी काम चल जाएगा। बाकी व्यवस्था विभाग कर लेगा। अगर उस ‘समीकरण’ का अफसर नहीं मिलता तो फिर वैकल्पिक व्यवस्था होगी। ग्रामीण विकास मंत्री के इस फामरूले की चर्चा दूसर राज्यों में भी हो रही है। उत्तर प्रदेश के एक मंत्री ने भी उनसे इस बार में जानकारी ली है।ड्ढr ट्रांसफर पोस्टिंग के इस नए फामरूले के पीछे श्री कुशवाहा का तर्क है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए। यहां लोकतंत्र है इस नाते जनप्रतिनिधियों को भी इतना अधिकार होना चाहिए कि वे अपने क्षेत्रों के लिए पसंद के अफसरों का चयन कर सकें ताकि जनता की अपेक्षा के अनुरूप विकास का काम हो।

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