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हर डायबिटीज मरीज की होगी आंखों की जांच

 आगरा, वरिष्ठ संवाददाता।  पिछले पांच साल के दौरान आंखों के रोगियों की संख्या बढ़ने का प्रमुख कारण डायबिटीज के रूप में सामने आया है। डायबिटीज तेजी से आंखों की रोशनी छीन रही है। मरीजों को इसकी जानकारी न होने से ही यह हालात बिगड़ रहे हैं। ऐसे में ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसायटी ने फैसला लिया है कि अब हर डायबिटीज पेशेंट की सबसे पहले आंखों की जांच होगी, ताकि आंखों के रोगियों की संख्या कम हो सके।

सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. कुरैश बी. मेस्केती ने बताया कि गाइड लाइन तैयार की जा रही हैं। वहीं केंद्र सरकार को भी इस नियम को सरकारी स्तर लागू करने का प्रयास होगा। कांफ्रेंस में कई और अहम फैसले लिए गए।

 सोसायटी के सदस्य देश भर में सभी राज्यों और जिलों की आईएमए इकाई के साथ मिलकर डायबिटीज के डॉक्टरों को इसके लिए प्रेरित करेंगे। सभी डॉक्टर डायबिटीज मरीजों को पहले आंखों की जांच के बारे में बताएंगे। - आईएमए के साथ मिलकर नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं फिजीशियन चिकित्सक क्लीनिक, अस्पतालों में बोर्ड चस्पा करेंगे।

इसमें यह जानकारी होगी। - केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजेंगे। इसमें सभी मेडिकल कॉलेजों एवं अन्य सरकारी अस्पतालों में ‘डायबिटीज के हर मरीज में पहले आंखों की जांच’ का नियम हर कीमत पर लागू करवाने को कहा जाएगा। - आईएमए कार्यकारिणी के साथ मिलकर सभी राज्यों की राजधानी में नशिुल्क शिविर लगाए जाएंगे। इसमें डायबिटीज के मरीजों की जांच करेंगे और जागरूकता कार्यक्रम चलाएंगे। - सोसायटी के दिल्ली कार्यालय में डॉक्टरों के लिए ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा। कांफ्रेंस के अलावा ट्रेनिंग सेंटर के जरिये देश भर के डॉक्टरों को ऑन लाइन ट्रेनिंग दी जाएगी।

- कार्बन पोल्यूशन कम करने को कागजों का उपयोग नहीं होगा, ईमेल के जरिये ही सूचनाओं का आदान-प्रदान होगा। - केंद्र सरकार द्वारा आई सेविंग उपकरणों को इम्पोर्ट करने के लिए टैक्स लगाया जा रहा है, इसे माफ करवाने का प्रस्ताव भेजा जाएगा, ताकि चिकित्सा सुविधा और बेहतर हो।

---------------------------------कांफ्रेंस में सामने आईं ये खास बातें -- ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलोजिकल सोसायटी वशि्व भर में नेत्र चिकित्सकों की सबसे बड़ी संस्था हैं। इसमें 15 हजार से अधिक सदस्य हैं। - वशि्व में सबसे पहले इंडिया में राष्ट्रीय अंधता नविारण कार्यक्रम सन 1976 में शुरू हुआ।

उस दौरान देश भर में ब्लाइंडनेस का औसत 1.4 फीसद था। - इसके बाद विजन 2020 सहित कई कार्यक्रम आए। लगातार प्रगति कर रहे इंडिया में अब ब्लाइंडनेस का आंकड़ा 0.8 फीसद रह गया है। - केंद्र सरकार मोतियाबिंद के मरीजों को 750 रुपये का लाभ देती है, इसे बढ़ाकर 1200 से 1500 रुपये तक करने पर विचार चल रहा है। - अंधता नविारण कार्यक्रम में मोतियाबिंद के साथ ग्लूकोमा, रेटिना आदि की परेशानी वाले मरीज भी नशिुल्क इलाज की श्रेणी में आएंगे।

- देश की प्रगति से ट्रैंड बदला है। अब कांफ्रेंस में अन्य देशों के डॉक्टर यहां सीखने आते हैं, वहीं इंडिया के डॉक्टर अन्य देशों में सिखाने जाते हैं।

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