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फाइलों में फंसी सिविल अस्पताल के विस्तार की योजना

लखनऊ। रजनीश रस्तोगी। कभी सूचना विभाग की तो कभी सिविल अस्पताल की जमीन की पैमाइश हुई। अफसरों ने मौके का मुआयना किया। कुछ ऐसी ही कवायद करीब 10 साल से सिविल अस्पताल को सूचना विभाग पिरसर से मिलाने की चल रही है लेकिन नतीजा िसफर ही िनकला है। मरीजों के बढ़ते दबाव से सिविल अस्पताल कराह रहा है। अस्पताल में 401 बेड हैं।

ओपीडी में रोजाना छह हजार से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। ओपीडी पतली सी गैलरी में चल रही है। पार्किंग की भी समस्या है। सुबह के वक्त पूरे पिरसर में बेतरतीब वाहन खड़े किए जा रहे हैं। कई बार एम्बुलेंस तक इमरजेंसी में नहीं पहुंच पाती। स्ट्रेचर और व्हील चेयर से मरीजों को इमरजेंसी तक पहुंचाया जाता है। मरीजों को मुशि्कलों से बचाने के लिए सूचना विभाग पिरसर को अस्पताल से जोड़ने की योजना बनी। योजना फाइल से बाहर ही नहीं आ सकी।

यह है प्रस्तावअधिकारियों के मुताबिक सूचना विभाग और मौजूदा समय में संचािलत ओपीडी के कमरों को तोड़ कर तीन से चार मिंजल का भवन बनेगा। इसमें प्रथम तल पर ओपीडी का संचालन होगा। बाकी दो तल पर मरीजों की भर्ती के लिए वार्ड बनाया जाएगा। करीब 300 बेड बढ़ाए जा सकते हैं। पार्किंग की समस्या से भी िनजात मिल जाएगी। इस हिस्से को मिलाया जा सकता हैसूचना विभाग पिरसर में दािखल होने के दो रास्ते हैं। पहला पार्क रोड और दूसरा िचिड़याघर की तरफ से।

अधिकारियों का कहना है कि पार्क रोड की तरफ का रास्ते का इस्तेमाल कम होता है। इससे सटा अस्पताल की ओपीडी है। िलहाजा सूचना विभाग के इस तरफ के हिस्से को आसानी से मिलाया जा सकता है। अधिकारी भी इसी हिस्से को मिलाने में अधिक रूिच ले रहे हैं। सिविल अस्पताल और सूचना विभाग पिरसर को मिलाने के प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी मिलने के आसार हैं। भूिम हस्तांतरण संबंधी प्रक्रिया अिंतम दौर में है। मुख्यमंत्री प्रस्ताव पर अिंतम मुहर जल्द ही लगा सकते हैं।

डॉ. खुर्शीद हसन, सीएमएस, सिविल अस्पताल।

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