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जन लोकपाल विधेयक पर केजरीवाल अडिग

आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना ही दिल्ली लोकपाल कानून -2014 के मसौदे को विधानसभा में पेश करने के अपने रुख पर कायम है। वरिष्ठ कानूनविद सोली जे सोराबजी द्वारा शनिवार को दी गई कानूनी सलाह के बाद ‘आप’ सरकार का रुख और सख्त हुआ है। सोराबजी ने सलाह देते हुए कहा है कि मेरी राय में दिल्ली लोकपाल कानून को विधानसभा में पेश करने पर संविधान और दिल्ली अधिनियम के तहत कोई रोक नहीं है। ट्रांजेक्शन बिजनेस रूल्स के तहत बने नियम संविधान और दिल्ली अधिनियम के विरोधाभाषी हैं।

उधर, पार्टी के नेता और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए संविधान के अनुच्छेद 239 एए और 255 का हवाला देते हुए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अधिनियम की धारा-22 के आधार पर अपने तरीके को सही बताया। साथ ही गृह मंत्रालय के उस आदेश को भी गलत बताया जिसके आधार पर विधायी प्रक्रिया के लिए बनाए गए ट्रांजेक्शन बिजनेस रूल्स के नियम 55(1) के तहत किसी भी कानून को सदन में पेश करने के लिए केंद्र की पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य किया गया है।

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