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बिहार में होगा त्रिकोणीय घमासान

बिहार में होगा त्रिकोणीय घमासान

सोलहवीं लोकसभा में बनने वाली भावी सरकार में यूपी के बाद अहम भूमिका बिहार की होगी। 40 सीटों वाले इस सूबे पर कांग्रेस और भाजपा दोनों की नजर है। भाजपा व जद(यू) अलग-अलग होकर चुनाव मैदाव में हैं तो कांग्रेस ने राजद व लोजपा के साथ मिलकर गठबंधन बनाने की कोशिश की है। सत्तारूढ़ जद(यू) ने वामपंथी दलों के साथ मिलकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।

बीते एक साल में राष्ट्रीय राजनीति में हुए बदलावों का सबसे ज्यादा असर बिहार पर पड़ा है। भाजपा का नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में आगे लाने की कोशिशों के साथ ही उसके जद(यू) के साथ डेढ़ दशक से ज्यादा पुराने रिश्ते टूट गए। दूसरी तरफ चारा घोटाले में राजद नेता लालू यादव के जेल जाने से मायूस हुए राजद ने उनके बाहर आने के बाद नई ऊर्जा व नए गठबंधन से मुकाबले को रोचक बना दिया है।

लालू यादव, रामविलास पासवान व कांग्रेस के साथ आने से राज्य के सामाजिक समीकरणों में यादव, दलित व मुसलमान का समीकरण अन्य दलों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

लालू-पासवान-कांग्रेस गठबंधन भारी: राज्य की राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन तब आया जब भाजपा व जेडीयू के रिश्ते टूटने के बाद जद (यू) व कांग्रेस में बढ़ रही गलबहियों पर लालू यादव ने रोक लगा दी। कांग्रेस ने भाजपा व मोदी का मुकाबले करने के लिए जद (यू) के बजाए लालू व रामविलास पासवान के साथ जाने का फैसला किया। सामाजिक व राजनीतिक ध्रुवीकरण में यह गठबंधन प्रभावी साबित हो सकता है।

निर्दलीयों का हिस्सा घटेगा: बीते चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार भी दो सीटों के साथ 12.12 फीसदी वोट ले गए थे। जीते हुए दोनों निर्दलीय उम्मीदवार इस बार भाजपा में आ गए हैं। इससे भाजपा को कुछ लाभ मिल सकता है। इसके अलावा त्रिकोणीय मुकाबले में निर्दलीय उम्मीदवारों की ताकत कम हो सकती है। उनको मिले वोटों में तीनों ही दल सेंध लगा सकते हैं। इस बार युवा मतदाता भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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