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‘भागे तो भागे अब चहेटकर नहीं पकड़ेंगे’

ुछ माह पूर्व तक पूर उत्साह और लगन से अपराधियों के विरुद्ध मुहिम चलाने वाली पटना पुलिस के कई थानाध्यक्षों के हौसले अब पस्त हो गए हैं। पुलिस के एक वरीय अधिकारी के बेटे से पूछताछ के कारण निलंबित किए गए एक थानाध्यक्ष के मामले ने कई अन्य थानाध्यक्षों के स्वाभिमान और सम्मान के ग्राफ को काफी नीचे गिरा दिया है। हालात यह है कि कई थाना प्रभारी जिनकी जांबाजी और कार्यकुशलता के किस्से सरकारी फाइलों में दर्ज हैं, अब संदिग्धों के विरुद्ध मुहिम चलाने से कतराने लगे हैं।ड्ढr ड्ढr एक माह पूर्व एक आईजी के बेट से पूछताछ और बड़े बाप के बेटे ने थानाध्यक्ष को देख लेने की धमकी और शाम होते होते उनके लाइन हाजिर और फिर निलंबन के आदेश ने पटना पुलिस को उद्वेलित कर रखा है। ‘दूध का जला मट्ठा भी फूंक फूं क कर पीने’ की कहावत को चरितार्थ करते हुए कई थानाध्यक्ष और उनसे नीचे के अधिकारी अब संदिग्ध युवकों को छेड़ने की बात तो अलग उन्हें छूने की भी हिमाकत नहंीं कर रहे हैं। डर है कि न जाने कब वर्दी उतारने की जरूरत पड़ जाए। एक अनुभवी थानाध्यक्ष की प्रतिक्रिया है कि ‘भागे तो भागे अब चहेट कर नहीं पकड़ेंगे।’ड्ढr सूत्रों पर यकीन करं तो छुट्टी पर गए एक थाना के प्रभारी ने तो अब प्रभारी के रूप में ज्वाइन न करने का फैसला भी कर लिया है। ऐसा नहीं कि यह दर्द किसी एक अधिकारी का है। ऐसे उद्वेलित थानाध्यक्षों और कनीय पुलिस अधिकारियों का मानना है कि कानून सबके लिए बराबर है। अगर किसी बड़े बाप या अधिकारी- पुत्र को पुलिस रोकती है और अधिकारी को उसकी सजा मिलती है तो फिर कानून का पालन करने और करवाने से क्या फायदा। पुलिस अधिकारियों के गीर हौंसले और अब अनमने भाव से काम करने के कारण ही राजधानी में अपराध का ग्राफ फिर बढ़ गया लगता है।

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