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हैलो, रॉन्ग नंबर!

हैलो, रॉन्ग नंबर!

बात 1991 की है। मुंबई के वर्ली इलाके में स्थित एक स्पोर्ट्स के शोरूम में फिल्म ‘कर्म योद्धा’ की शूटिंग चल रही थी। डिंपल कपाडिया और राज बब्बर पर एक अहम सीन फिल्माया जाना था। हालांकि उस दिन रविवार था, लेकिन कुछ मजबूरियों के चलते निर्देशक दयाल निहलानी को उस दिन वह सीन फिल्माना बहुत जरूरी था। डिंपल और राज ने सीन के लिए रिहर्सल शुरू की ही थी कि वहां गुजरते कुछ लोगों ने इन सितारों को देखा और देखते ही देखते वहां इतनी भीड़ जमा हो गयी कि शूटिंग करना ही मुश्किल हो गया। यह देख शोरूम का मालिक तक घबरा गया कि कहीं इस शूटिंग और सितारों के चक्कर में शोरूम ही तहस नहस न हो जाए। उधर दयाल निहलानी और सितारे भी कुछ डर से गए। तब दयाल ने डिंपल-राज से कहा कि एक-दो रिहर्सल के बाद जल्दी से एक ही टेक में इस सीन को पूरा कर दो। दोनों ने अपनी सहमति दे सीन शुरू किया। सीन बहुत ही अच्छे से चल रहा था। डिंपल राज के हाथ में टेनिस का एक रैकेट पकड़ाते हुए संवाद बोल ही रही थी कि तभी वहां साथ रखे फोन की घंटी बज उठी। सभी के चेहरों की रंगत उड़ गयी कि अब क्या करें। यह सीन तो गया, लेकिन डिंपल ने झट से समझदारी दिखाते हुए संवाद के बीच राज बब्बर को एक्सक्यूज मी कहते हुए फोन उठा लिया और बोली- ‘हैलो किससे बात करनी है? कौन, ओह नहीं, रॉन्ग नंबर!’ और यह कहते हुए फोन वापस रख डिंपल ने संवाद के साथ रैकेट राज बब्बर को थमाते हुए सीन पूरा कर दिया। डिंपल की यह समझदारी देख वहां मौजूद सभी लोगों ने तालियां बजा डालीं। डिंपल यह देख हंसते हुए अपना कॉलर ऊंचा करने लगीं। दयाल निहलानी और राज बब्बर ने कहा, हमें तो लगा कि यह सीन अब लटक ही जाएगा, लेकिन डिंपल ने चलते सीन के बीच इतना सोच लिया कि फोन का बजना उस सीन का खूबसूरत हिस्सा बन गया।  

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