DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अल्पसंख्यकों ने राहुल से मांगा हक

रांची। ब्यूरो प्रमुख। राहुल गांधी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से मिले। उनसे सीधी बात की। अल्पसंख्यक समाज के लोगों ने कांग्रेस के प्रति समर्थन जताया, लेकिन शिकायत भी की। मुसलिम समाज की तरफ से डॉ गुलफाम मुजबिी, सिख समाज की तरफ से ज्योति सिंह मथारू, ईसाई समाज की तरफ से बेंजामिन लकड़ा, बंगाली समाज की तरफ से चंचल चटर्जी के अलावा जैन समाज के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने समाज की बात रखी।

सिख समाज ने कहा कि 84 के दंगा पीड़ितों को मुआवजा दिलाएं और टेट परीक्षा में गुरुमुखी को शामिल किया जाना चाहिए। जाति प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है। इस वजह से समाज के लोग निकाय का चुनाव नहीं लड़ पाते। सिख समाज को एमपी, एमएलए के चुनाव में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। अल्पसंख्यक आयोग में जगह मिलनी चाहिए। सिख समाज कांग्रेस के साथ हमेशा रहा है, लेकिन उसे मान-सम्मान नहीं दिया गया। कांग्रेस से सिख दूर होते जा रहे हैं। 1984 के दंगे को हम लोग दुर्घटना मानकर भूल गए हैं।

आज तक उचित मुआवजा नहीं मिला। यहां की सरकार में कांग्रेस शामिल है। सरकार से उचित मुआवजा दिलाएं। संवैधानिक संस्थाओं में सिख समाज को जगह नहीं मिलती है। संगठन के ऊंचे पद नहीं दिए जाते हैं। सरकारी अधिकारी हमारी जाति और धर्म को सरकारी कागजातों पर नहीं लिखते हैं। खतियान की मांग की जाती है।

जैन समाजः संवेद शिखर को रेलवे लाइन से जोड़ा जाए। गिरिडीह में जैन समाज का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल संवेद शिखर है। जिस तरह मुस्लिमों के लिए मक्का मदीना अहम है, उसी तरह जैन समाज के लिए संवेद शिखर है।

हर जैन मरने के पहले वहां एक बार जाना चाहता है। वह स्थान आज तक रेल लाइन से नहीं जुड़ पाया है। वहां से पारसनाथ सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन है, जो 14 किलोमीटर दूर है। इस रेल लाइन को बनाने के लिए वर्षों पहले पहल हुई थी, लेकिन वह फाइलों के मकड़जाल में उलझकर रह गया। योजना आयोग के पास फाइल है। केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग में भी जैन समाज के लोगों को रखा जाना चाहिए।

ईसाई समाजः सीएनटी-एसपीटी का कड़ाई से पालन हो। राज्य में ईसाई समाज 1700 शैक्षणिक संस्थान चला रहा है। उन संस्थानों में 4.5 लाख बच्चों पढ़ रहे हैं। इसके बावजूद समाज के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। ईसाई सभी समाज को बेहतर शिक्षा देने का काम कर रहे हैं।

दूसरी तरफ अल्पसंख्यक शिक्षकों को नौ माह का वेतन मिल रहा है। यहां 98 प्रतिशत ईसाई आदिवासी समाज से आते हैं। राज्य में आदिवासियों की रक्षा की जानी चाहिए। आदिवासियों की जनसंख्या लगातार कम हो रही है। एमएलए की सीट कम हो रही है। आदिवासियों की जमीन की लूट हो रही है।

उसकी रक्षा की जानी चाहिए। पेसा कानून का लाभ आदिवासियों को नहीं मिल पा रहा है। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास के साथ सीएनटी और एसपीटी एक्ट का ईमानदारी से पालन किया जाना चाहिए।

मुस्लिम समाजः मुसलमानों का नहीं हुआ एक काम मुसलमानों को आरक्षण नहीं मिल रहा है। एमपी-एमएलए सीटों पर हिस्सेदारी नहीं मिल रही है। राज्य में 4200 उर्दू शिक्षकों की बहाली का मामला वर्षो से कागजों पर ही है। मदरसा बोर्ड, उर्दू एकेडेमी का गठन भी नहीं हुआ है। वक्फ बोर्ड का गठन छह माह से नहीं हो पा रहा है।

आबादी के हिसाब से अल्पसंख्यकों को सियासत में हिस्सेदारी नहीं मिल पा रही है। कांग्रेस संगठन में भी हक नहीं मिलता है। मुसलमान यहां दो नंबर के शहरी की तरह रह रहे हैं। झारखंड में यूपीए भी सत्ता में रहा। राष्ट्रपति शासन भी रहा, लेकिन मुसलमानों का एक काम नहीं हुआ। मुसलिम समाज ने कभी सांप्रदायिक ताकतों से हाथ नहीं मिलाया, इसके बावजूद समस्याओं का निराकरण नहीं हो रहा है।

बंगाली समाजः आंदोलन नहीं करते, इसलिए हक नहीं मिलता। झारखंड में 26 प्रतिशत बंगाली हैं। बार-बार उन्हें नजरअंदाज किया जाता है। रांची में 1985 से ही बंगालियों को सामाजिक और आर्थिक तौर पर दरकिनार किया गया। बंगाली आंदोलन नहीं करते, इसलिए उनकी कोई नहीं सुनता है।

अंग्रेजों से लेकर झारखंड आंदोलन तक में बंगालियों ने भूमिका निभाई। रांची संसदीय सीट से चार बार पीके घोष सांसद रहे, जो बंगाली थे। रांची विधानसभा सीट से बंगाली छह बार विधायक चुने गए थे। संवैधानिक संस्थाओं में बंगालियों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: अल्पसंख्यकों ने राहुल से मांगा हक