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मोबाइल नेटवर्क लील रहा गौरया-कौआ

देश में ग्लोबल वार्मिग के पीछे मोबाइल और टेलीविजन की भूमिका कम नहीं है। मोबाइल और टेलीविजन की तरंगों से न सिर्फ आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि पशु -पक्षी भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।ड्ढr एक शोध के अनुसार मोबाइल तरंगों के क्रॉस प्रक्रिया में वृद्धि होने से पक्षियों की मौत हो जा रही है। सबसे अधिक प्रभावित पक्षियों में गौरया और कौआ हैं। इनकी संख्या आधी से भी कम हो गयी है। यहीं वजह है कि शहरी इलाके में गौरया और कौआ पहले की तरह नहीं दिखते। पशु-पक्षियों के कल्याण के लिए काम कर रही एनजीओ होप एंड एनिमल वेलफेयर के प्रमुख और पूर्व पीसीसीएफ जेएल श्रीवास्तव ने बताया कि शुरू में जब मोबाइल और टीवी का इस्तेमाल जोर पकड़ने लगा और तरंगें हवा में आने लगीं तो उक्त दोनों प्रजाति के पक्षियों ने शहर से निकलकर गांवों में जाकर पेड़ों पर अपना आशियाना बनाया। लेकिन अब तो गावों में भी मोबाइल पहुंच गया।ड्ढr टीवी भी घर-घर में लग गया। कई कंपनियों के मोबाइल के नेटवर्क से निकलनेवाली तरंगों का क्रॉस कनेक्शन होने लगा। जिसका प्रभाव पक्षियों के पूर शरीर पर पड़ने लगा और पक्षी मरने लगे। ं

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