DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गांव में बिजली पहुंचाने का काम बेहद धीमा

पटना। संजय। गांवों में बिजली पहुंचाने का काम धीमा है। खासकर तार बिछाने और ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाने के मोर्चे पर काम लक्ष्य से पीछे चल रहा है। चालू वित्तीय वर्ष समाप्त होने में डेढ़ महीने बचे हैं, लेकिन ऊर्जा विभाग अपने बजट की पूरी राशि भी खर्च नहीं कर सका है।

इन कामों में पीछे जिला मुख्यालयों को 24 घंटे बिजली देने के बाद अनुमंडल स्तर पर 24 घंटे बिजली देने की योजना है। इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष 2013-14 में 82 पावर सब-स्टेशन बनाने का लक्ष्य तय किया गया पर अब तक मात्र 30 का ही निर्माण हो सका है।

11केवी में 16 हजार किलोमीटर में 5 हजार किलोमीटर ही तार बिछाए जा सके। मौजूदा पावर सब-स्टेशनों की क्षमता और गांवों/मोहल्लों में लगाए जाने वाले डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता नहीं बढ़ी।

गांवों को कम से कम एक हजार मेगावाट बिजली देनी थी। बिजली कंपनी 800 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने का दावा कर रही है। 500 निजी नलकूपों को सौर ऊर्जा की सुविधा देनी थी। इनमें मात्र पांच को सौर ऊर्जा की सुविधा मिली।

क्या होगा असरः तय लक्ष्य के अनुसार काम पूरा नहीं होने के कारण दसिंबर से जिला मुख्यालयों को 24 घंटे बिजली नहीं मिल रही। मार्च से मिलने के आसार हैं। बिजली योजनाओं की गति यही रही तो इस साल दसिंबर तक अनुमंडल मुख्यालयों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का दावा फेल हो सकता है।

सिंचाई के लिए किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिलेगी। पावर सब-स्टेशन नहीं लगने से अगर एक में खराबी आने से कम से कम 20-25 पंचायतों की डेढ़ लाख से अधिक आबादी प्रभावित होती है। 52 सब-स्टेशन के नहीं बनने से कम से कम 70 लाख से अधिक आबादी प्रभावित होगी।

कितना हुआ काम काम लक्ष्य हुआ 33/11 सब-स्टेशन 82 30 11केवी तार 16859 किमी 4932 किमी ट्रांसफॉर्मर 423 एमवीए 254 एमवीए पावर ट्रांसफॉर्मर 849 एमवीए 497 एमवी बिजली एक हजार मेगावाट 800 मेगावाट सौर ऊर्जा नलकूप 500 05।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:गांव में बिजली पहुंचाने का काम बेहद धीमा