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आप की सरकार ने आटो चालकों को दी राहत

नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता। दिल्ली में अब यदि कोई यात्री आटो चालकों के खिलाफ ओवरचार्ज या र्दुव्‍यवहार की शिकायत करने के लिए ट्रैफिक पुलिस के पास पहुंचता है तो हो सकता है, उसे निराशा हाथ लगे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा कर दी है कि परमिट उल्लंघन, ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस सर्टिफिकेट न होने पर ही गाड़ी जब्त हो सकेगी। दूसरे किसी भी ट्रैफिक उल्लंघन में गाड़ी जब्त नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला था कि रोड पर यदि कोई कॉमर्शियल वाहन लोगों की जान के लिए खतरा बनता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

दिल्ली सरकार की इस घोषणा के मुताबिक, अब किसी यात्री के साथ र्दुव्‍यवहार होता है या कोई आटो वाला चलने से मना कर देता है तो उसका केवल सौ रुपये का चालान होगा। फिलहाल ऐसे आटो को जब्त कर दो हजार रुपये का चालान किया जाता था। फिलहाल यह प्रस्ताव स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) के पास जाएगा। उसके बाद ही मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल होने का रास्ता साफ होगा। यह हैं पेचसुप्रीम कोर्ट ने 1997 में एमसी मेहता द्वारा दायर की गई याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि पुलिस और ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी को लगता है कि कोई वाहन दूसरे लोगों के लिए खतरा बन रहा है तो उसके खिलाफ मुनासबि कार्रवाई की जा सकती है।

ट्रैफिक नियमन में बाधा पहुंचाना भी इसी के तहत माना जाएगा। इसमें आरसी रद्द करने के अलावा परमिट भी निलंबित हो सकता है। वाहन जब्त करने का भी प्रावधान है। एसडीएम और एसीपी रैंक या उससे उपर के अफसर को पावर दी गई थी कि वे फ्लाइंग स्कवॉयड बनाकर ऐसे वाहनों की जांच करें। पुलिस तो यह काम कर रही है, लेकिन एसडीएम का इस तरफ ध्यान ही नहीं है। खास बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में केवल कॉमर्शियल वाहनों का जिक्र किया था।

उन्हें श्रेणी में नहीं बांटा था। अब दिल्ली सरकार ने खुद की मनमर्जी से कामर्शियल वाहनों को कई श्रेणियों में विभाजित कर दिया। इसमें भारी, मध्यम और हल्के भारवाहक वाहन शामिल कर दिए। आटो को हल्के वाहनों की श्रेणी में रख दिया। इस वजह से आटो को पुलिस कार्रवाई से थोड़ी छूट मिल गई।

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