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बजट में बड़े-बड़े वादे, हकीकत में जीरो

 आगरा, मनोज िमश्र।  जिला योजना के बजट में आगरा के लिए एक अरब 88 करोड़ रुपये स्वीकृत कर शासन ने विकास के बड़े-बड़े वादे किए। जब धनराशि को जारी करने का नंबर आया तो मात्र 20 करोड़ रुपये ही जारी किए गए।

यही नहीं यिद वर्ष 2013-2014 के अंतर्गत िदसंबर की प्रगति रिपोर्ट को देखें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 16 महत्वपूर्ण विभाग ऐसे हैंजिंनमें एक भी पैसा जारी नहीं हुआ है। नगर विकास और महिला एवं बाल कल्याण विकास के नाम भी कोई धनराशि जारी नहीं की गई। प्राथिमक शिक्षा के लिए 11 और माध्यिमक शिक्षा के लिए सात करोड़ स्वीकृत करने के बाद भी फूटी कौड़ी नहीं दी गई। जिला योजना सिमित से शासन को भेजे गए प्रस्ताव के बाद एक अरब 88 करोड़ 84 लाख रुपये विभिन्न विभागों के लिए स्वीकृत किए गए।

इसमें मात्र 20 करोड़ रुपये की धनराशि ही शासन से जारी की गई। ग्रामीण पेयजल ग्राम्य विकास के लिए 40 करोड़ 96 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई, लेकिन जारी एक पैसा भी नहीं हुआ। इस राशि से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए काम होना था। इसी तरह प्राथिमक शिक्षा के लिए 11 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। उसके बाद भी शासन से एक भी पैसा जारी नहीं किया गया। इस राशि से सर्व शिक्षा अिभयान, प्राथिमक और उच्च प्राथिमक विद्यालयों में हैंडपंप लगाने, विद्युतीकरण, चाहरदीवारी व शौचालयों का निर्माण और िमड-डे मील योजना में कुछ काम होना था।

माध्यिमक शिक्षा में सात करोड़ स्वीकृत होने के बाद ठेंगा िदखा दिया गया। इसमें भवनों के निर्माण, विद्युतीकरण, व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रमों के विषय विशेषज्ञों के मानदेय में खर्च होना था। महिला एवं बाल कल्याण के लिए 10 करोड़ी की राशि स्वीकृत करने के बाद शासन ने धनराशि देने में कोई िदलचस्पी नहीं दिखाई। यही हाल नगर विकास के लिए स्वीकृत तीन करोड़ 72 लाख की राशि का भी रहा। इसके लिए भी फूटी कौड़ी शासन द्वारा जारी नहीं की गई।

इन विभागों के लिए नहीं जारी हुआ धनविभाग स्वीकृत राशि जारीआयुर्वेिदक एवं यूनानी विभाग 14 लाख ----ग्रामीण पेयजल ग्राम्य विकास 4096 लाख ----नगर विकास 372 लाख -------प्राथिमक शिक्षा 1106 लाख ------माध्यिमक शिक्षा 749 लाख ------बाढ़ िनयंत्रण 242 लाख -----पर्यटन विभाग 70 लाख -----परिवार कल्याण 30 लाख -----िपछड़ा वर्ग कल्याण 532 लाख ------अल्प संख्या कल्याण 12.80 लाख ------------पंचायती राज 838 लाख -----------प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे गए थे लेकिन वहां से कुछ विभागों के लिए शासन से धनराशि स्वीकृत होने के बाद भी जारी नहीं हो पाई।

िपछले दो सालों सेजिंला योजना के स्थान पर राज्या योजना या अन्य मदों से पैसा विभागों को भेजा जा रहा है। यिदजिंला योजना से भी जारी हो जाता तो विकास कार्य बढ़ सकते हैं। चित्रा दुबे,जिंला अर्थ एवं सािंख्यकी अधिकारी।

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